सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
2 दिन वर्चुअल सुनवाई और 50% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम, जजों ने लिया कार-पूलिंग का संकल्प
सुप्रीम कोर्ट में भी देखने को मिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाने' की अपील का असर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाने' की वैश्विक अपील पर अमल करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव का ऐलान किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के तहत अब सुप्रीम कोर्ट सप्ताह में दो दिन पूरी तरह डिजिटल मोड में काम करेगा। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, अब प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को अदालत की कार्यवाही पूरी तरह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के जरिए संचालित होगी। इन दो दिनों में कोई भी भौतिक (फिजिकल) सुनवाई नहीं की जाएगी। वहीं, सप्ताह के मध्य के तीन दिन— मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को अदालत 'हाइब्रिड मोड' में कार्य करेगी, जहां वकीलों के पास कोर्ट रूम में आने या ऑनलाइन जुड़ने, दोनों का विकल्प होगा। कानूनी विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सर्वोच्च अदालत का यह कदम न केवल न्यायपालिका की आधुनिकता को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों जैसे ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति उसकी संवेदनशीलता को भी प्रमाणित करता है।
कर्मचारी करेंगे 'वर्क फ्रॉम होम'
ईंधन की बचत के लिए केवल सुनवाई के तरीके ही नहीं बदले गए हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। सभी जजों ने सर्वसम्मति से 'कार-पूलिंग' करने का निर्णय लिया है ताकि कम से कम सरकारी वाहनों का उपयोग हो। इसके अतिरिक्त, रजिस्ट्री के कामकाज को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है। इसके तहत रजिस्ट्री के प्रत्येक विभाग में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' की अनुमति दी गई है। इसके लिए साप्ताहिक रोस्टर तैयार किया जाएगा ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। अधिकारियों को यह शक्ति दी गई है कि अनिवार्य सेवाओं के लिए भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित करा सकें।
कामकाज पर नहीं पड़ेगा असर
अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का उद्देश्य कार्यक्षमता को प्रभावित करना नहीं, बल्कि उसे सुव्यवस्थित करना है। वर्चुअल और हाइब्रिड मोड से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले वकीलों और वादियों के समय और धन की भी बचत होगी। रजिस्ट्री अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तकनीकी बाधाओं को दूर कर ऑनलाइन सुनवाई को निर्बाध सुनिश्चित करें।


No comments:
Post a Comment