महंगाई आज के परिदृश्य में
राजीव त्यागी
वजह चाहे मिडिल ईस्ट युद्ध हो या फिर अपनी नीतियां इस समय देश में महंगाई सबसे गंभीर आर्थिक समस्या बन चुकी है। हालत यह है कि आज आम आदमी की वास्तविक पीड़ा को समझने वाला कोई नहीं रह गया है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दाल, तेल, सब्जियां, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग का जीवन कठिन बना दिया है।
महंगाई का सबसे अधिक प्रभाव निम्न और मध्यम आय वर्ग पर पड़ रहा है, क्योंकि उनकी आय तो सीमित होती है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जाते हैं। पहले जो परिवार आसानी से अपने मासिक बजट का संचालन कर लेते थे, आज उन्हें आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच समझौता करना पड़ रहा है। बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और पोषण जैसी मूलभूत जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं।
महंगाई बढ़ने के कई कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, बढ़ती जनसंख्या, जमाखोरी तथा बाजार में असंतुलन इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त, बेरोजगारी और आय में अपेक्षित वृद्धि न होने से समस्या और गंभीर हो जाती है। डिजिटल और उपभोक्तावादी संस्कृति ने भी लोगों की आवश्यकताओं को बढ़ाया है।
सरकार समय-समय पर महंगाई नियंत्रण के लिए विभिन्न कदम उठाती है, जैसे ब्याज दरों में परिवर्तन, आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करना तथा बाजार की निगरानी। लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज और नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। अनावश्यक उपभोग को कम करना, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना तथा संसाधनों का संतुलित उपयोग करना आवश्यक है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। यदि आम आदमी की थाली और जेब सुरक्षित नहीं है, तो विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले प्रतीत होते हैं। इसलिए सरकार, बाजार और समाज तीनों को मिलकर इस समस्या नियंत्रण करना होगा, तभी आम आदमी राहत की सांस ले सकेगा।





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