ताकि युवा हों मजबूत

इलमा अज‍़ीम 
किसी भी देश को इतनी क्षति युद्ध या महामारी से नहीं होती है जितनी तबाही नशे के कारण हो सकती है। इसलिए सरकार, स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को इस विषय पर जरूरी कदम जल्दी ही उठा लेने चाहिए। यदि विद्यार्थी किशोरावस्था में नशे से बच जाता है तो वह फिर युवावस्था आते आते समझदार हो गया होता है। 

माध्यमिक से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को विभिन्न विद्याओं में व्यस्त रखने के साथ साथ शारीरिक फिटनेस की तरफ मोडऩा बेहद जरूरी हो जाता है। मानव का सर्वांगीण विकास शिक्षा के बिना अधूरा है। शिक्षा की परिभाषा में साफ-साफ लिखा है कि यहां शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से बराबर विद्यार्थियों का विकास करना है जिससे वह आगे चलकर जीवन को सफलतापूर्वक खुशहाल जी सके। शारीरिक विकास के लिए खेलों के माध्यम से फिटनेस कार्यक्रम बहुत जरूरी हो जाता है। 

प्रतिस्पर्धी पढ़ाई की होड़ में हम विद्यार्थियों की फिटनेस को ही भूल गए हैं। पहले विद्यालय आने जाने के लिए कई किलोमीटर दिन में पैदल चलना पड़ता था, इसलिए उस समय के छात्रों को किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम की कोई जरूरत नहीं थी। आज का विद्यार्थी घर के आंगन में बस पर सवार होकर विद्यालय के प्रांगण में उतरता है। 

पढ़ाई के नाम पर ज्यादा समय खर्च करने के कारण फिटनेस के लिए कोई समय नहीं बचता है और जो थोड़ा बहुत समय बचता है उसमें विद्यार्थी मोबाइल पर बर्बाद हो रहा है। आज का छात्र फिटनेस व मनोरंजन के नाम पर दूरसंचार माध्यमों का कमरे में बैठ कर खूब दुरुपयोग कर रहा है। ऐसे में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास की बात मजाक लगती है। आज के विद्यार्थी के लिए विद्यालय या घर पर आधे घंटे के फिटनेस कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। आज के विद्यार्थी को अगर कल का अच्छा नागरिक बनाना है तो हमें स्कूली पाठ्यक्रम के साथ साथ ही उसके लिए सही फिटनेस कार्यक्रम देना होगा। 

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