आयुर्वेद में है पार्किंसन डिजीज की बेहतर चिकित्सा : वैद्य हितेश

मेरठ।  4 व 5 अप्रैल को मेरठ के आई.आई.एम. टी. विश्वविद्यालय में न्यूरो डिजनरेटिव डिसोर्डर्स विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का आयोजन किया गया ।

कान्फ्रेंस में भाग लेने गए नगर के पञ्चकर्म एवं क्षारसूत्र चिकित्सा विशेषज्ञ वैद्य हितेश कौशिक ने बताया कि न्यूरो डिजनरेटिव डिसोर्डर्स का मुख्य कारण शरीर में वात दोष का बढ़ना है।और ये वात दोष हमारे गलत खानपान एवं सही समय पर नींद न लेने तथा सही समय पर व्यायाम न करने के कारण बढती है । पार्किन्सन्स डिजीज न्यूरो डिजनरेटिव डिसोर्डर्स का ही एक रोग है ।जो वृद्धावस्था में बहुत अधिक देखने को मिलता है ।परन्तु हमारी आजकल की जीवनशैली के कारण यह रोग 30 वर्ष के आसपास के लोगों में भी देखने को मिल रहा है । उन्होंने इससे बचने के लिए आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ एवं समय पर भोजन, रात में समय पर नींद,सदाचार का पालन करने को कहा ।उन्होंने बताया कि अगर व्यक्ति रोजाना तेल से मालिश करता है और ऋतुओं के अनुसार पञ्चकर्म कराता रहे तब भी ऐसे भयंकर रोग से बचाव हो जाता है ।

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