तुम मुझे जानते नहीं...!
- ललिता जोशी
अपने देश में रहने वाले अक्सर अपनी टौर में रहते हैं । टशन दिखाना अब तो हमारे चरित्र की विशेषता है । ये सब बढ़ता ही जा रहा है । कभी पार्किंग के लिए मारा -मारी तो कभी कुत्ते की पोटी इधर -उधर पड़ी हो तो उसके लिए मार -पिटाई ,तो कभी अपने फ्लेट में आनधिकृत निर्माण कार्य कर अपने पड़ोसी को तंग करना ऐसे अनेकों -अनेक कारण पैदा कर फिर उस पर धौंस देना की आप मुझे जानते नहीं की मैं किन -किन को जानता हूँ । कभी -कभी बहस इतनी बढ़ जाती है कि मर्डर भी कर दिया जाता है ।
अपनी कॉलोनी में रहने वाले सभी लोग सरकारी ब्यूरोक्रेसी के महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं । इनमें से कुछ शालीन होते हैं तो कुछ छिछोरे । हमारी कालोनी में एक जिसु जी रहते हैं । जो कोलोनी के पुराने निवासियों में से एक हैं । जिसु जी अपनी कॉलोनी में खुद को स्वयंभू देवता समझते हैं । कॉलोनी में कहीं कोई समस्या हो अपनी सलाह देने लगते हैं । चाहे उनसे कोई सलाह मांगे या न मांगे जिसु जी को सलाह देनी ही है । कॉलोनी और मोहल्ले में कोई आ जाए तो बस दो इडली लेकर उसके घर पहुँच जाएंगे और स्वर इतना मीठा की कोयल भी शरमा जाये और धूर्त इतने कि लोमड़ी भी उनके आगे पानी भरती नज़र आए । जिसु जी को लगता है कि उनको सब हाथ जोड़कर नमस्कार करें । अरे भाई कौन समझाये उनको की इज्जत कमाई जाती है न कि जबर्दस्ती करवाई जाती है । कोई आपके कर्ज के बोझ तले थोड़ा ही दबा हुआ जो आपको डर के मारे हाथ जोड़े और आपको शीश नवाए । जिसु जी का हाल ये कि दिल है कि मानता नहीं । दिल के हाथों मजबूर होकर आए दिन किसी न किसी से उलझते नज़र आ जाते हैं और फिर मुंह की खाते हैं ।
जिसु अंकल पूरी कॉलोनी के लोगों पर प्रभाव जमाने की कोशिश करते ही रहते हैं । लोगों को प्रभावित करने के लिए ये कुछ भी कर सकते हैं और किसी भी हद तक जा सकते हैं । जिसु जी कॉलोनी में किसी के घर दो इडली ,पूरी सब्जी, डोसा भेज देंगे और बदले में उसे अपने इस अहसान के तले दबाने की कोशिश करते हैं । जिसु ये सब भी एक रणनीति के तहत करते हैं । अपनी नौकरानी का काम बढ़ाते है और इसी बहाने अपनी बची -खुची सब्जियों को ठिकाने भी लगा लेते हैं । जिसु जी का व्यर्थ माल अर्थवान हो जाता है और जिसु जी समर्थ ।
जिसु जी अपने को एलीट समझते हैं और उनको अन्य लोग अनपढ़ और गंवार लगते हैं । वो सभी को अपने से कम समझते हैं । मजेदार बात है की ये अपने को इतना इलिट समझते हैं कि इन्हें पता ही नहीं चलता कि ये कब लोगों के दिल -दिमाग से डिलीट हो चुके हैं । अपने को फनैखान समझने की बीमारी लाइलाज होती है । इसका इलाज तो सिर्फ मनोवैज्ञानिक ही कर सकते हैं । जिसु जी को अपनी प्रॉपर्टी ,गाड़ियों और पढ़ाई -लिखाई पर बहुत गुमान है । जिसु जी एक दिन मुझ पर धौंस जमाने लगे कि आपने जो पेंट करवाया उसका रंग मुझे पसंद नहीं है आप उसे बदलो । जब उनकी ये बकवास सुनते -सुनते इंतिहा हो गई तो बड़े ही मुलायम लहजे में मैंने कहा “मुझे आपका पहनावा अच्छा नहीं लगता । अब आप बताओं मैं क्या करूँ ‘
इतना सुनते वो बिदक गए और गुस्से में बोलने लगे कि तुम मुझे नहीं जानते । मैं कौन हूँ और किन -किन को जनता हूँ ? “ मैंने कहा “न तो आप भगवान न ही कोई प्रसिद्ध व्यक्ति । जैसे मैं भारत की एक नागरिक हूँ वैसे ही आप भी एक नागरिक हो । आप पर कोई सुरखाब के पंख नहीं लगे हुए । “ इतना सुनते ही जिसु जी फिर बोलें “आप मुझे जानते नहीं कि में क्या हूँ ।“
इनका ये डायलाग अभी दिमाग में घूम ही रहा था की टीवी में खबर सुनी कि एक महिला जो केदारनाथ की यात्रा पर थी और वहाँ के लोडर्स को धमका कर कह रही थी “तुम मुझे जानते नहीं हो मैं किन -किन को जानती हूँ । तुम्हें एक सेकंड में ठीक करवा दूँगी । “ आजकल तुम मुझे जानते नहीं हो का सिंड्रोम सिर चढ़ कर बोलता है । अगर पुलिस किसी की गलती पर चालान काटे तो उनको धौंस देने लगेंगे कि आप मुझे जानते नहीं मेरे चाचा -मामा -फूफा होम मिनिस्ट्री में बड़े अधिकारी हैं ।
अरे भाई जब कानून का उल्लंघन किया है तो दंड तो भुगतना पड़ेगा । मगर ये तो आज हर किसी की जबान पर चढ़ा रहता है कि आप मुझे जानते नहीं । अरे भई किसी को क्या ही करना है आप को जानकर । आप कोई राजा तो हो नहीं जो आप को कोई जानेगा या जानना चाहेगा । अब लोकतन्त्र में वैसे ही सब राजा हैं । तो फिर धौंस पट्टी क्यों ?अब तो आम जनता भी उन्हीं राजनीतिक दलों को जानती और मानती है । जिनसे उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत योजनाओं लाभ मिले ।
अरे भाई क्या ही फर्क पड़ता है ? आप को कोई जानता है कि नहीं । अरे जब ईश्वर भी अवतरण में आ जाए तो आदमी भी उन्हें पहचान नहीं पाऐ । जब उन्होने चमत्कार के रूप में अपनी लीलायें इन्सानों को दिखाई तो फिर सब ने उन्हें प्रणाम किया । ये जिसु जी जैसा आदमी भी क्या चीज है ।अभी तो कोढ़ पर खाज की तरह एक और भद्र महिला कालोनी में आ गई हैं और जिसु जी की तर्ज पर भौकाल मचाए हुए है । ये लोग अब महामारी की तरह फैलते जा रहे हैं । ये सफेदपोश बदमाश न जाने कब समाप्त होंगे । इनके लिए भी कोई ठोस कानून बनना चाहिए । ताकिलोग के जुबान पर ये बात सोच -समझ कर आए कि आप मुझे जानते नहीं कि मैं किन -किन को जानता हूँ । जिसु जी अपने इस डायलाग को इस तरह से कहते हैx :
महफिल में जो उठाई हैं उँगलियाँ मेरी तरफ, उन सब से यही कहना है : ‘तुम मुझे जानते नहीं हो’।
(मुनरिका एन्क्लेव, दिल्ली)






No comments:
Post a Comment