डर, चिंता, क्रोध, अपराधबोधअवचेतन में जमा होकर तनाव पैदा करते हैं-प्रो. नीरज कुमार
मेरठ कॉलेज के विधि विभाग में एक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
मेरठ। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मेरठ काॅलेज के चिकित्सा समिति द्वारा विधि विभाग में एक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में प्राणीशास्त्र विभाग, मेरठ कॉलेज विभागाध्यक्ष प्रो. नीरज कुमार ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य के क्वांटम स्तर के कारणों, उसके वैज्ञानिक पहलुओं तथा आधुनिक शोध के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी।
प्रो. कुमार ने बताया कि मानव शरीर सूक्ष्म स्तर पर होने वाले जैविक एवं रासायनिक परिवर्तन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषरूप से अवचेतन मन सीधे हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह हमारे विचारों, भावनाओं और आदतों को नियंत्रित करता है।नकारात्मक विचार (डर, चिंता, क्रोध, अपराधबोध) अवचेतन में जमा होकर तनाव पैदा करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर, नींद की समस्या,ऑटो इम्यून डिसआर्डर यहाँ तक की कैंसर तक हो सकता है। इसके अलावा कई अन्य
मनोदैहिक रोग जैसे सिरदर्द, गैस, पाचन संबंधी समस्या, त्वचा रोग आदि मानसिक स्थिति से प्रभावित होते हैं। यदि हम इसे सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करें तो कई बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य में सुधार संभव है। उन्होनें बताया कि प्रकृति से एकात्म रुप में सामंजस्य, ध्यान, योग, प्राणायाम और सात्विक आहार इत्यादि द्वारा मन और शरीर दोनों को संतुलित किया जा सकता हैं। इस अवसर पर प्रो.दयानन्द द्विवेदी समन्वयक, चिकित्सा समिति ने मानव शरीर के पंचकोशीय प्रणाली के मुख्य घटक मनोमय कोश, प्राणमय कोश तथा अन्नमय कोश के असंतुलन का व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य (शरीर, मन और आत्मा) पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव तथा उसके समाधान की चर्चा की। कार्यक्रम में प्राध्यापकगण प्रो. विभा तोमर, प्रो. नीलम पंवार, प्रो. सचिन शर्मा,(सदस्य,चिकित्सा समिति) प्रो. सीमा पंवार, डीन, मेरठ कॉलेज, प्रो.प्रवीण दुवलिश, प्रो. अर्चना सिंह, प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज, प्रो. हरजिंदर सिंह, प्रो.एम.पी.वर्मा, प्रो.अल्पना रस्तोगी,प्रो.सीमा शर्मा , शोधार्थी नेहा, अंकित,भावना,ब्रजेश, रानी एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


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