बाबा साहब ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने की की थी वकालत

रिजर्व बैंक की अवधारणा है बाबा साहेब की देन

मेरठ कॉलेज की केंद्रीय लाइब्रेरी में हुई बाबा साहब की जयंती पर संगोष्ठी

मेरठ।  डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर मेरठ कॉलेज में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगोष्ठी का विषय रहा— “बाबासाहेब का बहुआयामी योगदान: अर्थव्यवस्था, भाषा और सामाजिक न्याय”।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य युद्धवीर सिंह ने कहा कि बाबासाहेब का योगदान केवल भारतीय संविधान के निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने देश की आर्थिक संरचना को मजबूत आधार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य वक्ता प्रो सतीश प्रकाश ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना के पीछे भी बाबासाहेब की दूरदर्शी सोच का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution” में उन्होंने भारत की मौद्रिक नीति और केंद्रीय बैंक की आवश्यकता को विस्तार से स्पष्ट किया था। उनके इन विचारों के आधार पर वर्ष 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई, जो आज देश की आर्थिक व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है।

संगोष्ठी में प्रो नीरज कुमार ने यह भी उल्लेख किया कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन किया था। उनका मानना था कि संस्कृत भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और यह सभी भाषाओं के लिए समान आधार प्रदान कर सकती है। इस दृष्टिकोण को आज भी भाषाई एकता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रोफेसर रेखा राना ने बाबासाहेब के महिला सशक्तिकरण संबंधी प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, विवाह और तलाक में समानता दिलाने का प्रयास किया। हालांकि उस समय इस विधेयक का विरोध हुआ, लेकिन बाद में इसके कई प्रावधान कानून के रूप में लागू हुए, जिससे महिलाओं को व्यापक अधिकार प्राप्त हुए।

अंत में, संगोष्ठी में उपस्थित सभी लोगों ने बाबासाहेब के विचारों को आत्मसात करने और सामाजिक समानता व न्याय के उनके संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। प्रो कपिल सिवाच ने कहा कि आज डॉ बी आर अंबेडकर सर्व समाज के स्वीकृत महापुरुष बन चुके हैं। संगोष्ठी में मीनाक्षी शर्मा, अनुराग सिंह, नरेंद्र प्रताप सिंह, राजीव कुमार, देवेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार एवं दीपक शर्मा इत्यादि का विशेष सहयोग रहा।


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