महिलाओं ने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़े
बिजली घर फेंके:बिजली घर पर विभाग के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी
बोलीं- नहीं चाहिए, अपने मीटर वापस लो
मेरठ। नहीं चाहिए, नहीं चाहिए स्मार्ट मीटर नहीं चाहिए...! सोमवार को मोहन पुरी की महिलाओं ने घरों पर लगे स्मार्ट मीटर उखाड़ दिए। विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यह महिलाएं बिजली घर पर पहुंची और वहां मीटर फेंक आईं।महिलाओं का कहना था कि उन्होंने विभागीय अफसरों से मदद मांगी लेकिन मदद नहीं मिली। मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है।
मामला नगर निगम के वार्ड 44 में आने वाले मोहनपुरी क्षेत्र का है। जहां पिछले काफी समय से स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध हो रहा है। विरोध करने वालों का आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने धोखे से स्मार्ट मीटर बदल दिए। भरोसा दिलाया गया था कि बिजली बिल कम हो जाएंगे लेकिन वह कई गुना आ रहे हैं।
सुपरीटेंडेंट इंजीनियर का किया था घेराव
पिछले काफी समय से महिलाएं सड़क पर उतरकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर का विरोध कर रही हैं। इसी विरोध के चलते हाल ही में मोहनपुरी स्थित बिजली घर पर चल रहे कैंप को बंद करा दिया गया था।
यही नहीं कैंप में पहुंचे सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर को बंधक बनाते हुए उन्हें चूड़ी तक भेंट कर दी थी। महिलाओं ने चेतावनी दी कि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह मीटर उखाड़ फेंकेंगी।
मीटर उखाड़े, बिजली घर पर फेंके
सोमवार को महिलाओं का सब्र जवाब दे गया। उन्होंने अपने घरों पर लगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर उखाड़ दिए। वह उन मीटरों को लेकर मोहनपुरी बिजली घर पहुंची और वहां फेंक दिए।महिलाओं ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद उत्तम सैनी भी वहां पहुंच गए। उन्होंने महिलाओं को शांत किया और अफसरों से बात करने की कोशिश की।
बिजली काटे जाने से दिखी परेशान
महिलाएं स्मार्ट मीटर को लेकर काफी परेशान थी। उन्होंने कहा कि पहले महीने में बिल आता था तो वह जैसे तैसे उसे जमा कर देती थीं। नहीं भी जमा करते थे तो बिजली कटती नहीं थी। जब से यह स्मार्ट मीटर लगे हैं तब से घरों के बिजली के बिल 700 रूपए से 7000 रुपए तक हो गए हैं। एक महीना भी नहीं बीता है और उनकी तीन से चार बार बिजली कट गई है।
मीटर वहीं छोड़कर वापस लौटी महिलाएं
महिलाओं ने हाथ में लिए मीटर फेंक दिए और नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वह अपने घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगने देंगे। अफसरों से गुहार लगाई थी लेकिन जब उन्होंने कोई मदद नहीं की तो वह अपने मीटर खुद उतार कर ले आई हैं। अब केवल साधारण मीटर ही लगने देंगे। धीरे-धीरे अन्य परिवार भी यह मी खुद उखाड़कर फेंक देंगे।


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