महिलाएं बोलीं- घर टूटा तो जहर खा लेंगे
फूट-फूटकर रोईं; सीलिंग के बाद सड़क पर डॉक्टरों ने मरीज देखे
मेरठ। सैंट्रल मार्केट में 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को दो महीने के अंदर तोड़ने के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। हाथ में पोस्टर लेकर धरना दिया। रोते-बिलखते हुए कहा- आवास विकास की कारवाई में अगर प्रतिष्ठान और मकान टूटते हैं तो हम जहर खा लेंगे।
उन्होंने कहा-पहले बच्चों का स्कूल बंद हुआ। फिर दुकान पर सील होने लगी। अब सेटबैक के तहत दुकान के ऊपर जो मकान बने हैं। वह भी टूटने जा रहे हैं। हम जहर खाकर मरने को मजबूर हैं।
इससे पहले, सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियां सील की जा चुकी हैं। इसे लेकर भी व्यापारियों में खासी नाराजगी है। सीलिंग के बाद जो क्लीनिक और अस्पताल बंद हुए हैं। उसके बाहर डॉक्टर डॉक्टर्स ओपीडी चला रहे हैं। मरीजों का इलाज कर रहे हैं।कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में दुकान चलाने वाले मोहित ने बताया कि जो व्यापारी पिछले 25 सालों से यहां दुकान चला रहे थे। आज वही खुद अपनी दुकानों को तोड़ रहे हैं। इस मामले का दोषी आवास विकास परिषद है। अगर हमारा बाजार गलत था। हम गलत तरीके से यहां बाजार बना रहे थे तो आवास विकास को उसी समय रोक देना था।
दरअसल, 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया। अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में किया गया निर्माण। कोर्ट ने यूपी के अधिकारियों को फटकार लगाई। कहा- स्कूलों, अस्पतालों और यहां तक कि सरकारी बैंकों को भी ऐसी इमारतों से चलाने की इजाजत कैसे दी, जो पूरी तरह से अवैध और बिना इजाजत हैं। मामले में 6 अप्रैल को कोर्ट ने 859 संपत्तियों में से सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया था और रिपोर्ट मांगी थी।
'व्यापारी कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर रहे'
पलायन के पोस्टर लगाने के बाद नौचंदी थाना प्रभारी द्वारा पोस्टर हटाने और पोस्टर का कारण पूछने के विरोध में अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने कहा- व्यापारी कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने रोजगार का साधन और आवास टूटने का विरोध कर रहे हैं।
लगभग 25 से 30 मरीजों का इलाज किया गया
डॉ अभिषेक जैन के स्टाफ में मौजूद साकिब ने बताया- मरीज परेशान है, इसलिए उनको यहीं बुला लिया गया था। आज सड़क किनारे बैठकर और दूसरे डॉक्टर ने लगभग 25 से 30 मरीज का इलाज किया है। इस दौरान मरीजों को काफी परेशानी हुई है।
डॉक्टर सील अस्पताल के बाहर इलाज कर रहे
मरीज महेंद्र ने बताया कि सोमवार को भी इलाज कराने आए थे। उस दिन भी डॉक्टर का क्लीनिक बंद था। आज फिर से आए हैं। लगभग 2 घंटे से सड़क किनारे बैठे हैं। गुर्दे में समस्या है इसलिए बहुत परेशानी हो रही है। बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है, लेकिन शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल खुला होता तो आराम रहता।
शहजाद ने बताया- 2 घंटे बाद डॉक्टर ने इलाज किया
शाहजहांपुर से इलाज कराने आए शहजाद ने बताया कि डॉक्टर अभिषेक जैन के यहां इलाज कराने आए हैं। क्लीनिक बंद मिला फोन किया तो उन्होंने कहा कि बाहर ही आ जाना। वहीं देख लेंगे। उसके बाद यहां सड़क किनारे बैठे हैं। लगभग 2 घंटे बैठे रहने के बाद डॉक्टर ने बराबर में एक दूसरे डॉक्टर की क्लीनिक पर जिस पर सील अभी तक नहीं लगी है। वहीं बैठ कर इलाज हुआ।
सपा ने आवास विकास के अफसरों के खिलाफ प्रदर्शन किया
सपा ने सेंट्रल मार्केट प्रकरण में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि सपा नेता जीतू नागपाल और शैंकी वर्मा के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। जब व्यापारियों के भवनों पर सील लगाई जा रही थी, तब जीतू नागपाल व्यापारियों को समझाने का प्रयास कर रहे थे। एक व्यापारी को दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में उन्होंने उसे स्वयं एम्बुलेंस तक पहुंचाया।
अस्पताल सील तो सड़क पर कर रहे उपचार
सेंट्रल मार्केट की सीलिंग की कार्रवाई की चपेट में क्लीनिक और अस्पताल भी आ गए। सीलिंग से पहले मरीजों को यहां से शिफ्ट करा दिया गया था। मगर ओपीडी सेवा अभी भी चालू है। अस्पतालों के बाहर इलाज किया जा रहा है। सड़क किनारे मरीजों को बैठाकर इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
किसान नेता बोले- आवास विकास ने पहले क्यों नहीं रोका
भारतीय किसान यूनियन धन सिंह कोतवाल ने सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के समर्थन में कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने 44 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर की गई सीलिंग और पूर्व में हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर व्यापारियों को राहत देने की मांग की।
यूनियन के जिला अध्यक्ष अभिषेक चपराणा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि यदि व्यावसायिक भवनों का निर्माण गलत था, तो आवास विकास के अधिकारियों ने शुरुआत में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि शहर में इतनी बड़ी व्यावसायिक मार्केट कैसे बन गई, जबकि आवास विकास का कार्यालय पास में ही है।
थाना प्रभारी बोले- कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं होने देंगे
महिलाओं के प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर नौचंदी थाना प्रभारी अनूप सिंह पहुंचे। उन्होंने महिलाओं से पलायन का कारण पूछा। महिलाओं ने बताया कि हम अपनी मर्जी से जाना चाहते हैं। मेरा तो सबकुछ उजड़ गया। थाना प्रभारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। इस बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा। कोर्ट के आदेश की अवहेलना भी नहीं होने दूंगा।
अफसरों ने पैसे लेकर हमें मरने के लिए छोड़ दिया
नीलम ने कहा कि हमारी दुकान भी गई। पैसा भी गया और मकान भी गया। इसका जिम्मेदार केवल आवास विकास है। उसके अधिकारी हैं। आवास विकास के अधिकारियों ने पैसा लेकर अपना काम तो कर लिया, लेकिन अब जब व्यापारियों पर संकट आया तो पल्ला झाड़ लिया।
जो हो रहा उसके लिए आवास विकास जिम्मेदार है
शीतल ने बताया कि 38 मीटर में मेरा मकान है। जिसमें नीचे दुकान बनाई हुई थी। तीन भाई एक साथ रहते हैं। घर में कुल 13 लोग हैं। अब अगर सेटबैक के तहत उसमें से भी दुकान के साथ-साथ मकान टूट जाएगा तो परिवार का क्या होगा? रोजगार का जो साधन था। वह तो छीना जा चुका है। अब मकान पर भी संकट आ गया है। समझ नहीं आ रहा है अब क्या करें। इसमें केवल हमारी गलती नहीं है। आवास विकास के अधिकारियों की मिलीभगत से ही सब कुछ हुआ है।
सिम्मी बोलीं- हम कहां जाएंगे, हम तो बर्बाद हो गए
शास्त्री नगर क्षेत्र में रहने वाली सिम्मी मौर्य ने बताया कि यहां पर मेरी दुकान है। उसके ऊपर ही मकान बनाया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेटबैक के तहत दुकानें तोड़ने का आदेश दिया गया। जिसकी चपेट में मकान भी आएगा। कुछ दिन पहले ही एमपीएस स्कूल में बच्चों का एडमिशन करा कर पैसा जमा कराया था। वहां भी सीलिंग की कार्रवाई हो गई। बच्चे का स्कूल बंद हो गया। हमारी दुकान बंद हो गई। अब मकान भी टूटने के कगार पर है। ऐसे में हम क्या करें यह समझ नहीं आ रहा है। इसलिए हमने पलायन के पोस्टर लगा दिए हैं। यदि आवास विकास का यही रवैया रहा तो हम जहर खा लेंगे।


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