नशे की गिरफ्त में युवा

 राजीव त्यागी 
युवा वर्ग, जो किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होता है, आज नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है। नशा व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को समाप्त कर देता है। यह उसकी मानसिक स्थिति को इस हद तक प्रभावित करता है कि वह सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पाता। 

परिणामस्वरूप, वह ऐसे जघन्य अपराध कर बैठता है, जिनकी कल्पना भी सामान्य अवस्था में नहीं की जा सकती। नशे के प्रभाव को यदि गहराई से समझा जाए, तो यह केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक संकट है। नशे के कारण व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ता है, परिवार टूटते हैं और समाज में अपराध की दर बढ़ती है।

 नशे की लत व्यक्ति को इस कदर जकड़ लेती है कि वह अपने जीवन के उद्देश्य, अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह भूल जाता है। यही कारण है कि आज कई युवा अपनी ही जिंदगी को नष्ट कर रहे हैं और साथ ही दूसरों के जीवन को भी खतरे में डाल रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा के संदर्भ में स्थिति और भी अधिक गंभीर हो जाती है। हाल की घटनाओं ने प्रदेश की बहू-बेटियों में भय और असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान ही किसी समाज की प्रगति का वास्तविक मापदंड होता है। 

यदि महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं तो उस समाज के विकास का कोई भी दावा खोखला साबित होता है। इस समस्या के पीछे कई कारण हैं। बेरोजगारी, युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव, सामाजिक दबाव और गलत संगत, ये सभी कारक युवाओं को नशे की ओर धकेलते हैं। इसके अलावा नशा तस्करों का सक्रिय नेटवर्क भी इस समस्या को बढ़ावा दे रहा है। 

यह नेटवर्क इतनी गहराई तक फैल चुका है कि इसे खत्म करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार यह भी आशंका जताई जाती है कि इस अवैध कारोबार को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त होता है, जिसके कारण यह धंधा लगातार फल-फूल रहा है। यदि इस पर समय रहते कड़ा नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।

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