कलाकारों ने विभिन्न राज्यों की संस्कृति की दिखाई झलक 

 मेरठ।   वर्ल्ड राग प्रोडक्शन (डब्लूआरपी) स्टूडियो कंकरखेड़ा में एक शाम लोक संस्कृति के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार डॉ. विजयपाल सांवरिया रहे। कार्यक्रम के संयोजक वर्ल्ड राग प्रोडक्शन (डब्लूआरपी) के अर्पित वैद्य ने बताया कि स्टूडियो के कलाकारों द्वारा भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों की झलक प्रस्तुत की गई। जिसमें 30 से ज्यादा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। राजस्थान की रंगीली संस्कृति, पंजाब का भांगड़ा, उत्तराखंड की शांत पहाड़ों की धुन, गुजरात के गरबा और डांडिया, और महाराष्ट्र के लावणी ने दर्शकों को अपनी सीटों से उठने और झूमने पर मजबूर कर दिया।

 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न राज्यों की पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरा स्टूडियो लोक संस्कृति के रंगों में डूब गया। भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। 

डॉ. सांवरिया ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भारत की विविधता में एकता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर विशाल है, जिसमें हमारी अनगिनत सभ्यताएं और लोक कलाएं शामिल है। ऐसे कार्यक्रमों से हमारी पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी विरासत को संरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है, कि हमारी वेशभूषा, भाषा अलग हो सकती है, लेकिन हमारी संस्कृति की आत्मा एक है। और यही संस्कृति  भारत को एकता के सूत्र में बांधती है। हमारा भारत विविधता वाला देश कहा जाता है। जहां कुछ किलोमीटर पर खानपान, भाषा, पहनावा और परंपराएं बदल जाती है। लेकिन इन सब के बीच भारत की आत्मा हमारी संस्कृति हमें एक सूत्र में बांधे रखती है। हमारी संस्कृति हमें भाईचारा और एकता का संदेश देती है। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत हर प्रस्तुति में उस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और जीवन शैली की झलक देखने को मिली। इस दौरान कुल 8 प्रस्तुतियां दी गई प्रत्येक प्रस्तुति ने अलग-अलग राज्यों की  सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। राजस्थान के प्रसिद्ध घूमर और कालबेलिया लोकनृत्य ने मंच पर रंग जमा दिया। कलाकारों की वेशभूषा और ऊर्जा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में भगवान कृष्ण के ब्रज क्षेत्र के गानों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कृष्ण भक्ति का नृत्य देखकर सभी की नजरे ठहर गई। कार्यक्रम के संयोजक (डब्लूआरपी) स्टूडियो के डायरेक्टर राजा कश्यप ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य कलाकारों को अपनी संस्कृति को पहचानने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहे कलाकारों को प्रमाण पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर  सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विकास, संगीता विजय,  पायल, शिवा, सिमरन, वैभव और प्रिया का सहयोग रहा।

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