नारी-शक्ति वंदन कानून लागू न होने पर महिलाओं में फूटा आक्रोश

विपक्ष का पुतला फूंका, कहा- आने वाले चुनाव में विपक्ष का करेंगे विरोध

बुढाना गेट से निकाली गयी  जन आक्रोश पदयात्रा 

 मेरठ। बुढ़ाना गेट क्षेत्र में बुधवार को महिलाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) को लागू न किए जाने के विरोध में जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और बुढ़ाना गेट पर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के हाथों में तख्तियां और बैनर नजर आए, जिन पर विपक्षी दलों, कांग्रेस के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। पूरे इलाके में “महिला का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” और “कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी।इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित विपक्षी गठबंधन का पुतला भी दहन किया। महिलाओं ने एकजुट होकर कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए अब सड़कों पर उतर चुकी हैं और पीछे हटने वाली नहीं हैं।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं बीना वाधवा ने कहा कि यह आंदोलन दोहरी मानसिकता और महिलाओं के साथ हुए विश्वासघात के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया और राजनीतिक भागीदारी से दूर किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 17 सितंबर 2023 को महिला आरक्षण संशोधन बिल संसद में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों ने कभी इसे परिसीमन से जोड़ा, तो कभी राजनीतिक एजेंडा बताकर इसका विरोध किया और असली मुद्दे से ध्यान भटकाया।

बीना वाधवा ने आगे कहा कि जब संसद में इस बिल के समर्थन का समय आया, तो विपक्षी गठबंधन ने इसके खिलाफ वोट किया। इसी के विरोध में आज महिलाएं सड़कों पर उतरी हैं। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और जिन दलों ने इस बिल का समर्थन नहीं किया, उनके दोहरे चरित्र को उजागर करेंगी। साथ ही आने वाले चुनावों में महिलाओं से ऐसे दलों के खिलाफ मतदान करने की अपील भी की जाएगी

उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो चुका है और हाल ही में 16, 17 और 18 तारीख को विशेष सत्र बुलाया गया था, ताकि इसे जल्द लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। उनका कहना था कि अगर यह कानून समय पर लागू होता है, तो 2029 के चुनाव में महिलाओं को इसका अधिकतम लाभ मिल सकेगा।कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे नारी सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करेंगी और आने वाले चुनावों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर जवाब देंगी।

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