जो ईश्वर-दर्शन तत्क्षण घट में करवाए, वहीं है सच्चा गुरु” - डॉ. सर्वेश्वर

शिव कथा के षष्ठम दिवस तारकासुर वध गाथा का किया व्याख्यान

 “दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान करवाता है ईश्वर का साक्षात् दर्शन

मेरठ।  दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा गढ़ रोड स्थित बुद्धा गार्डन में 1 से 7 अप्रैल तक सात-दिवसीय शिव कथा के षष्ठम दिवस दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक व संचालक दिव्य गुरु  आशुतोष महाराज  के शिष्य, कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने तारकासुर वध की गाथा को भक्तों के समक्ष प्रस्तुत किया।

 कथा- प्रसंग का मर्म समझाते हुए स्वामी  ने बताया कि ‘तारकासुर’ का शाब्दिक अर्थ है ‘तारने वाला असुर’। यह तारकासुर उन तथाकथित धर्मगुरुओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो समाज को तारने के उपदेश तो देते हैं, लेकिन न तो उन्होंने स्वयं ईश्वर का दर्शन किया है और न ही अपनी शरण में आए जिज्ञासुओं को ईश्वर दर्शन करवाने का सामर्थ्य रखते हैं। उल्टा, वे लोगों को अपने शब्दजाल में फँसाकर और भी भ्रमित कर देते हैं। ऐसे में आज आवश्यकता है कि हम भी पूर्ण गुरु की पहचान करें। पूर्ण गुरु वही होते हैं, जो दीक्षा देते समय मस्तक पर हाथ रखकर तत्क्षण ही ईश्वर का दर्शन भीतर करवा देते हैं। वे कोई मंत्र, माला या नाम नहीं देते, बल्कि ईश्वर के प्रकाश रूप को भीतर प्रकट कर देते हैं। ईश्वर दर्शन की इसी सनातन विद्या को शास्त्रों में ‘ब्रह्मज्ञान’ कहा गया है। अतः हमें ऐसे सद्गुरु की खोज करनी चाहिए, जो हमें ब्रह्मज्ञान प्रदान करने का सामर्थ्य रखते हों। यदि कहीं न मिलें, तो दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में ईश्वर का तत्क्षण प्रत्यक्ष दर्शन करवाया जाता है। ईश्वर दर्शन के सच्चे जिज्ञासुओं का संस्थान स्वागत करता है।

इस अवसर पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के अध्यक्ष - स्वामी आदित्यानंद  भी उपस्थित रहे! स्वामी ने दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज  के सम्बन्ध में बताया कि यूँ तो आशुतोष महाराज वेदों में आधुनिक विज्ञान में पी एच डी हैं और चालीस से अधिक भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। लेकिन उनका वास्तविक परिचय ये सांसारिक उपलब्धियां नहीं हैं, अपितु वो ब्रह्मज्ञान है, जिसके वो प्रदायक हैं। इस ब्रह्मज्ञान के माध्यम से श्री महाराज जी असंख्य लोगों के जीवन में परिवर्तन ला रहे हैं, और कलियुग में भी सतयुग सा वातावरण निर्मित कर रहे हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में श्री महाराज जी के चरण कमलों में समर्पित कई हज़ार साध्वियां एवं साधु हैं, जो सनातन धर्म का संरक्षण कर रहे हैं और मनुष्य को शाश्वत भक्ति की ओर अग्रसर कर रहे हैं। संस्थान से जुड़े हुए जितने भी अनुयायी हैं, चाहे वो गृहस्थ हो या सन्यासी हो, चाहे वो बच्चे हो या वृद्ध हो, वे सभी वेदों उपनिषदों के सार को अपने जीवन में उतार रहे हैं। जिस आध्यात्मिक क्रांति का आगाज़ श्री राम, श्री कृष्ण, आदिगुरु-शंकराचार्य, महात्मा बुद्ध, स्वामी विवेकानद जैसे महापुरुषों ने किया था, आज उसी क्रांति के पथ प्रदर्शक स्वयं आशुतोष महाराज हैं।  आशुतोष महाराज  द्वारा प्रदत्त ब्रह्मज्ञान मनुष्य के भीतर राम के तत्व रूप को जागृत कर रहा है और जन-जन में राम-राज्य को स्थापित कर रहा है

विशेष अतिथि के रूप में  सोमेंद्र तोमर (राज्य मंत्री) राजेंद्र अग्रवाल  (पूर्व संसद, मेरठ) और  सतबीर त्यागी (पूर्व विधायक, किठौर) भी उपस्थित रहे।


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