केरल विधानसभा चुनाव

मतदान से पहले 'विज्ञापन वॉर' पर ब्रेक: 8 और 9 अप्रैल को चुनावी विज्ञापनों पर पाबंदी

चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं छपेंगे राजनीतिक विज्ञापन

तिरुवनंतपुरम(केरल)। चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में चुनावी सुचिता बनाए रखने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 से मिली अपनी विशेषाधिकार शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मतदान के दिन और उससे ठीक एक दिन पहले यानी 8 और 9 अप्रैल को प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के प्रकाशन पर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

केरल के मुख्य चुनावी अधिकारी रतन यू केलकर ने स्पष्ट किया कि चुनाव के बिल्कुल अंतिम क्षणों में अक्सर ऐसे विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं जो भ्रामक, आपत्तिजनक या भड़काऊ हो सकते हैं। चूंकि ये विज्ञापन मतदान से चंद घंटे पहले आते हैं, इसलिए विरोधी दलों या उम्मीदवारों के पास उन पर स्पष्टीकरण देने या पलटवार करने का पर्याप्त समय नहीं होता। इस 'लास्ट मिनट' प्रोपेगेंडा को रोकने के लिए ही यह फैसला लिया गया है। चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद अब सभी राजनीतिक दलों को अपने प्रचार अभियानों की रणनीति में बदलाव करना होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चुनावी कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अनुच्छेद 324: आयोग का 'ब्रह्मास्त्र'

संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की असीमित शक्ति प्रदान करता है। इसी शक्ति के तहत आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रहे और मतदाता किसी झूठे दावे से प्रभावित न हो। नए निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या संगठन बिना मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति की पूर्व अनुमति के कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकेगा।

विज्ञापन छापने के इच्छुक पक्ष को प्रकाशन की तिथि से कम से कम दो दिन पहले अपना आवेदन राज्य या जिला स्तरीय समिति को देना होगा। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सामग्री किसी की गरिमा को ठेस न पहुँचाए और नियमों के दायरे में हो।

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