सेंट्रल मार्केट विवाद, सेक्टर-2 में लगे पलायन के पोस्टर, लोगों का छलका दर्द

 पोस्टर हटाने के लिए गये  पुलिस को विराेध का करना पड़ा सामना 

 मेरठ।सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर सेक्टर-2 में रहने वाले लोगों का दर्द सामने आने लगा है। क्षेत्र में कई स्थानों पर निवासियों ने पलायन के पोस्टर लगा दिए, जिससे इलाके में हलचल मच गई। मकान बिकाऊ के पोस्टर लगने पर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। दौरान नाैंचदी थाने के  नौचंदी थाना प्रभारी अनूप सिंह पोस्टर हटाने के लिए पहुुंचे तो लोगों ने उनका जमकर विराेध किया। मामला गंभीर होता देख पुलिस वहां से खिसक गयी। 

 स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके घर छोटे-छोटे हैं और ऐसे में सेटबैक की प्रक्रिया लागू करना उनके लिए संभव नहीं है। उनका कहना है कि यदि सेटबैक लागू किया गया तो किसी का बाथरूम तो किसी का ड्राइंग रूम खत्म हो जाएगा। निवासियों ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में वे आखिर रहेंगे कहां। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए समाधान निकालना चाहिए, ताकि आम लोगों को अपने ही घरों से बेघर होने की नौबत न आए।

व्यापारी गोपाल सूदन का कहना था कि यह दृश्य केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस गहरी पीड़ा और असहायता का प्रतीक है जिससे व्यापारी समाज इस समय गुजर रहा है। जिन लोगों ने वर्षों तक अपने शहर की अर्थव्यवस्था को गति दी, आज वही लोग अपने भविष्य को लेकर असमंजस में खड़े दिखाई दे रहे हैं। बोले हमारे समाज में एक कहावत प्रचलित है। “मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है।”लेकिन आज सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की स्थिति को देखकर यह कहावत कहीं-न-कहीं असहाय सी प्रतीत होती है। फिर भी उम्मीद अभी समाप्त नहीं हुई है। लोकतंत्र में संवाद, संवेदना और समाधान की संभावना हमेशा बनी रहती है। व्यापारी समाज आज भी यही उम्मीद लगाए बैठा है कि कोई ऐसा रास्ता निकलेगा, जिसमें कानून का सम्मान भी बना रहे और हजारों परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।

 अब पल्ला झांड रहे आवास विकास के अधिकारी 

नीलम ने कहा कि हमारी दुकान भी गई। पैसा भी गया और मकान भी गया। इसका जिम्मेदार केवल आवास विकास है। उसके अधिकारी हैं। आवास विकास के अधिकारियों ने पैसा लेकर अपना काम तो कर लिया, लेकिन अब जब व्यापारियों पर संकट आया तो पल्ला झाड़ लिया।



 दुकान के साथ मकान टूट जाएगा तो कहां रहेंगे 

शीतल ने बताया कि 38 मीटर में मेरा मकान है। जिसमें नीचे दुकान बनाई हुई थी। तीन भाई एक साथ रहते हैं। घर में कुल 13 लोग हैं। अब अगर सेटबैक के तहत उसमें से भी दुकान के साथ-साथ मकान टूट जाएगा तो परिवार का क्या होगा? रोजगार का जो साधन था। वह तो छीना जा चुका है। अब मकान पर भी संकट आ गया है। समझ नहीं आ रहा है अब क्या करें। इसमें केवल हमारी गलती नहीं है। आवास विकास के अधिकारियों की मिलीभगत से ही सब कुछ हुआ है।

 यही रवैया रहा तो जहर खा लेंगे 

 सिम्मी मौर्य ने बताया कि यहां पर मेरी दुकान है। उसके ऊपर ही मकान बनाया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेटबैक के तहत दुकानें तोड़ने का आदेश दिया गया। जिसकी चपेट में मकान भी आएगा। कुछ दिन पहले ही एमपीएस स्कूल में बच्चों का एडमिशन करा कर पैसा जमा कराया था। वहां भी सीलिंग की कार्रवाई हो गई। बच्चे का स्कूल बंद हो गया। हमारी दुकान बंद हो गई। अब मकान भी टूटने के कगार पर है। ऐसे में हम क्या करें यह समझ नहीं आ रहा है। इसलिए हमने पलायन के पोस्टर लगा दिए हैं। यदि आवास विकास का यही रवैया रहा तो हम जहर खा लेंगे।

डॉ अभिषेक जैन के स्टाफ में मौजूद साकिब ने बताया- मरीज परेशान है, इसलिए उनको यहीं बुला लिया गया था। आज सड़क किनारे बैठकर और दूसरे डॉक्टर ने लगभग 25 से 30 मरीज का इलाज किया है। इस दौरान मरीजों को काफी परेशानी हुई है।


मरीज महेंद्र ने बताया कि सोमवार को भी इलाज कराने आए थे। उस दिन भी डॉक्टर का क्लीनिक बंद था। आज फिर से आए हैं। लगभग 2 घंटे से सड़क किनारे बैठे हैं। गुर्दे में समस्या है इसलिए बहुत परेशानी हो रही है। बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है, लेकिन शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल खुला होता तो आराम रहता।

शहजाद ने बताया- 2 घंटे बाद डॉक्टर ने इलाज किया

शाहजहांपुर से इलाज कराने आए शहजाद ने बताया कि डॉक्टर अभिषेक जैन के यहां इलाज कराने आए हैं। क्लीनिक बंद मिला फोन किया तो उन्होंने कहा कि बाहर ही आ जाना। वहीं देख लेंगे। उसके बाद यहां सड़क किनारे बैठे हैं। लगभग 2 घंटे बैठे रहने के बाद डॉक्टर ने बराबर में एक दूसरे डॉक्टर की क्लीनिक पर जिस पर सील अभी तक नहीं लगी है। वहीं बैठ कर इलाज हुआ।

सपा ने आवास विकास के अफसरों के खिलाफ प्रदर्शन किया

सपा ने सेंट्रल मार्केट प्रकरण में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि सपा नेता जीतू नागपाल और शैंकी वर्मा के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। जब व्यापारियों के भवनों पर सील लगाई जा रही थी, तब जीतू नागपाल व्यापारियों को समझाने का प्रयास कर रहे थे। एक व्यापारी को दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में उन्होंने उसे स्वयं एम्बुलेंस तक पहुंचाया।

अस्पताल सील तो सड़क पर कर रहे उपचार

सेंट्रल मार्केट की सीलिंग की कार्रवाई की चपेट में क्लीनिक और अस्पताल भी आ गए। सीलिंग से पहले मरीजों को यहां से शिफ्ट करा दिया गया था। मगर ओपीडी सेवा अभी भी चालू है। अस्पतालों के बाहर इलाज किया जा रहा है। सड़क किनारे मरीजों को बैठाकर इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।

 दो दिन बाद खुला सैंट्रल मार्केट 

 पिछले दो से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते 44 भूखंडों में सीलिंग की कार्रवाई और  फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के चलते बंद चल रहा सैंट्रल मार्केट खुल गया । बाजार में वह रौनक तो नहीं दिखाई दी। दुकानें तो खुली लेकिन ग्राहक नदारद नजर आए । वही कोर्ट के आदेश के बाद अब उन दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठनों को उस हिस्सों को तोड़ना आरंभ करा है जो सैट बैक के अंदर आ रहा है। सबसे  ज्यादा समस्या उन दुकानदारों को आ रहा है। जिनकी दुकाने छोटी है । अगर वह सैट बैक को तोड़ते है दुकान ही समाप्त हो जाएगी । उनकी कमाई का जरिया सिर्फ और सिर्फ दुकान ही जरिया था। दुकान समाप्त होने से उन पर रोजी का संकट आने वाला है। 

  



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