पूर्व राज्य मंत्री सुनील भराला ने केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव को लिखा पत्र

 फिल्म एवं वेब सीरीज के जाति सूचक शब्दों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की 

 मेरठ।  रिलीज होने से पहले घूसखोर पंडित का विराेध होना शुरू हो गया है।साामाजिक संगठनों के साथ भाजपा नेताओं ने इसका विराेध आरंभ कर दिया है। पूर्व राज्यमंत्री सुनील भराला ने केन्द्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव को पत्र लिखते हुए है जाति सूचक शब्दों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। 

पूर्व राज्य मंत्री सुनील भराला ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ फिल्मों एवं वेब सीरीज में इस प्रकार की सामग्री प्रस्तुत की जा रही है, जो सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के उद्देश्य से किसी विशेष समाज अथवा जाति को सामूहिक रूप से अपराधी की छवि में प्रस्तुत कर रही है। “घूसखोर पंडत" जैसे शब्द न केवल अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुँचाने वाले भी हैं।

प्रश्न यह नहीं है कि फिल्में बनाई जाएँ या नहीं, बल्कि प्रश्न यह है कि क्या किसी एक जाति या समाज को सामूहिक रूप से बदनाम करना उचित है? ऐसा कृत्य संविधान की भावना के विपरीत है तथा समाज को विभाजित करने वाला है।

ब्राह्मण समाज का राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक योगदान रहा है। देश की स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम चिंगारी मंगल पांडे ने प्रज्वलित की। चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महान क्रांतिकारी हँसते-हँसते शहीद हुए। शिक्षा के क्षेत्र में पंडित मदन मोहन मालवीय  ने पूरे देश को दिशा दी। डॉ. भीमराव अंबेडकर  के जीवन में भी ब्राह्मण समाज के अनेक गुरुओं एवं सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह इतिहास किसी भी रूप में नकारा नहीं जा सकता।

यह भी अनुरोध है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्मों एवं वेब-सीरीज की सामग्री का गंभीरतापूर्वक परीक्षण किया जाए। यदि किसी भी माध्यम में जातिसूचक अथवा अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आज चिंता का विषय यह है कि कानूनों का दुरुपयोग कर पूरे समाज को डराने, फँसाने एवं अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो न्यायोचित नहीं है।

सुनील भराला ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुरोध किया कि संबंधित अधिकारियों एवं सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को निर्देशित किया जाए कि वे तत्काल ऐसी फिल्मों एवं कंटेंट पर प्रतिबंध लगाएँ तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें, जिससे किसी भी समाज, विशेषकर बुद्धिजीवी वर्ग, की गरिमा सुरक्षित रह सके।

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