विज्ञापन और जनसंपर्क में एआई ने बढ़ाई रोचकता और काम किया आसान

-एआई ने विज्ञापन और जनसंपर्क के क्षेत्र में परिदृश्य को पलट दिया 

-MCU में दो दिवसीय एआई पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस

-8 और 9 दिसंबर को जुटेंगे देश-विदेश के एक्स्पर्ट 

-200 से अधिक शोध पत्र पढ़े जाएंगे  

-ऑनलाइन-ऑफलाइन प्रतिभागियों ने बताए चौंकाने वाले तथ्य

-विविध शहरों से आए प्रतिभागी सहित MCU के छात्रों ने भी रखे विचार 

इंदौर । -एआई हमारी दुनिया को पल-प्रतिपल बदल रहा है खासकर विज्ञापन और जनसंपर्क के क्षेत्र में आए बदलाव चकित कर देने वाले हैं...इसी को केंद्र में रखते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन और जनसंपर्क विभाग द्वारा एक मेगा इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया. इस कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश के 200 से अधिक शोध छात्र, शिक्षक, विशेषज्ञ और विद्वानों ने ऑनलाइन-ऑफलाइन अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से विज्ञापन और जनसंपर्क के साथ लाइफस्टाइल में आए क्रांतिकारी परिवर्तन संबंधी नई जानकारी, चिंता, चुनौती, विचार और संभावना को विस्तार से व्यक्त किया.

अतिथि वक्ता के रूप में शामिल एआई विशेषज्ञ श्री जयप्रकाश पाराशर ने बताया कि एआई चाहे जितना आगे बढ़ जाए पर वह मनुष्य से ज्यादा रचनात्मक सोच और कल्पना नहीं ला सकेगा लेकिन जीवन के हर क्षेत्र में एआई अब हमारी जरुरत है इसे हम जितनी जल्दी अपना साथी बना लेंगे उतना ही बेहतर होगा.हर हफ्ते एआई का नया टूल आ रहा है और हमें लगातार लर्निंग मोड में रहना होगा.हर कुछ जो हम सीख रहे हैं वह अगले कुछ दिनों में पुराना हो रहा है.

उन्होंने रोचक उदाहरणों  से बताया कि एआई कैसे विज्ञापन और प्रोडक्ट के प्रति लोगों के रुझान और मानवीय व्यवहार का अध्ययन कर सकता है और कैसे तत्काल अपनी रणनीति में रुचि,अपेक्षा और जरुरत के अनुसार बदलाव करने में मदद कर सकता है.यहाँ तक कि डिजाइन, वॉईजओवर और कॉपी राइटिंग में भी सहायक हो सकता है.

उनके अनुसार एआई को अभी इतनी समझ नहीं है किस बात या शब्द का समाज पर क्या असर होगा अत: मानव मस्तिष्क की जरुरत हमेशा रहेगी. 

आयोजन की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि एआई पर कोई भी आयोजन इवेंट तक सीमित न हो बल्कि पाठ्यक्रम में इसे पूरी ताकत से शामिल करना होगा और एमसीयू इस दिशा में अपने चरण और प्रयास बढ़ा चुका है. 200 सालों जो परिवर्तन हुए वे अकल्पनीय थे लेकिन अब जो विगत 30 सालों में तकनीकी क्रांति आई है उसके साथ कदम ताल करना बेहद जरुरी है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी नकली मेधा. सोचिए मेधा नकली कैसे हो सकती है पर यह आज की सचाई है. हम चाहते हैं यहाँ से जब विद्यार्थी निकले तो इस भाव और तैयारी से निकले कि हमें वो सब कुछ आता है जिसकी हमारे प्रोफेशन में बने रहने और आगे बढ़ने के लिए जरुरत है...

कुलसचिव प्रो. पी शशिकला के बताया कि पिछले दिनों हर विभाग में एआई पर मास्टर क्लास, वर्कशॉप,ट्रेनिंग प्रोग्राम आदि किए जा रहे हैं और एआई व टेक्नॉलॉजी को मीडिया से जोड़ने की पहल भी जारी है. ज्ञान आधारित और तथ्य आधारित एआई को समझाते हुए उन्होंने कहा कि कंवर्जन्स और इंटीग्रेटेड तरीके से मीडिया में इसका लाभ लिया जा सकता है. जो भी जानकारी हम शेयर कर रहे हैं उसे ट्रांसफॉर्म भी करना होगा. 

विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि अमेरिका,बहरीन, बुल्गारिया, बांग्लादेश, नेपाल,श्रीलंका और दुबई सहित कई देशों से शोध प्राप्त हुए हैं. इस दो दिवसीय आयोजन को 16 सत्रों में विभाजित किया गया है और प्रस्तुति में तीन श्रेणी के अवॉर्ड भी दिए जाएंगे. सभी शोध पत्रों के एब्स्ट्रेक्ट को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया है. 

उद्घाटन सत्र के बाद हुई ऑनलाइन प्रस्तुति में डॉ.डायना पेट्कोवा (सोफिया यूनिवर्सिटी,बुल्गारिया), डॉ.मनोज जिनदासा(केलानिया विश्वविद्यालय,श्रीलंका) और प्रो. मोहम्मद शाहिदुल्लाह (चिटगांव विश्वविद्यालय,बांग्लादेश) ने प्रतिभागिता दी. अगले दिन 9 दिसंबर के सत्र में डॉ. सर्गेई सैमोइलैंको(जार्ज मैसन यूनिवर्सिटी, अमेरिका),डॉ. मनीष वर्मा( बहरीन पॉलिटेक्निक,बहरीन),प्रो.डॉ. निर्मलमणि अधिकारी,( काठमांडू विश्वविद्यालय,नेपाल) और श्री विनोद नागर(संस्थापक,सीबीएमडी,एआई) के शोध पत्र आकर्षण का केंद्र रहेंगे.


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