समाज की सभी समस्याओं के समाधान के लिए डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षाओं का प्रसार करना होगा : प्रो. राकेश कुमार शर्मा
हमें डॉ. राधाकृष्णन जैसा महत्वपूर्ण कार्य करने की आवश्यकता है : प्रो. सगीर अफराहीम
डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षाओं का अनुसरण करेंगे तो अवश्य सफल होंगे : डॉ. विवेक त्यागी
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग द्वारा "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: व्यक्तित्वऔर सेवाएँ" विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन
मेरठ । एक शिक्षक ही समाज को अत्यंत सुंदर बना सकता है और डॉ. राधाकृष्णन ने एक उत्कृष्ट शिक्षक बनकर एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। हम एक सफल इंसान कैसे बन सकते हैं, यह हमें डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षाओं से सीखना होगा। ये शब्द चौधरी चरण सिंह विवि के शारीरिक शिक्षा संकाय के डीन प्रोफेसर राकेश कुमार के थे, जो उर्दू एवं जीवन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: व्यक्तित्व और सेवाएँ" विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना वक्तव्य दे रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि समाज की सभी समस्याओं के समाधान के लिए डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षाओं का प्रसार करना होगा। इससे पहले सईद अहमद ने पवित्र कुरान की तिलावत से कार्यक्रम की शुरुआत की। अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक प्रो. सगीर अफराहीम ने की। प्रो. राकेश कुमार शर्मा [डीन फिजिकल एजुकेशन, सीसीएसयू] और डॉ. विवेक कुमार त्यागी [विधि विभागाध्यक्ष, सीसीएसयू] मुख्य अतिथिगण के रूप में उपस्थित रहे। आयुसा की अध्यक्ष प्रो रेशमा परवीन वक्ता के रूप में और डॉ. जयवीर सिंह राणा [सहायक प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग], डॉ. महिपाल सिंह [सहायक प्रोफेसर, विधि विभाग] और डॉ. सिरिल गोरन [इतिहास विभाग, आरजीपी कॉलेज, मेरठ] विशिष्ट अतिथि के रूप उपस्थित रहे। अतिथियों का परिचय डॉ. अलका वशिष्ठ ने, स्वागत भाषण डॉ. शादाब अलीम ने , संचालन डॉ. आसिफ अली ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इरशाद स्यानवी ने किया। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो असलम जमशेदपुरी ने कहा कि राधाकृष्णन जी एक शिक्षक थे। शिक्षक होना कोई नई बात नहीं है। शिक्षक तो अनेक हुए, लेकिन डॉ. राधाकृष्णन अद्वितीय शिक्षक थे। एक अच्छा शिक्षक कैसा होता है, यह जानने के लिए राधाकृष्णन को पढ़ें। जब हम 5 सितंबर को उनकी जयंती मनाते हैं, तो हमें यह भी शपथ लेनी चाहिए कि हम उनके समान कार्य करेंगे। भारत के सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी उन्होंने कभी ईमानदारी नहीं छोड़ी। उन्होंने भारत को आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन बलिदान कर दिया। डॉ. विवेक त्यागी ने कहा कि इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने काम के कारण पहचाने जाते हैं। आज हम डॉ. राधाकृष्णन को याद कर रहे हैं। आप देश के राष्ट्रपति थे, लेकिन आपकी पहचान एक शिक्षक के रूप में अधिक थी। आज भारत की शिक्षा प्रणाली में डॉ. राधाकृष्णन के महान बलिदान शामिल हैं। हमें उनके विचारों को दूर-दूर तक फैलाना होगा। एक शिक्षक होने के नाते, मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि अगर हम डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षाओं का पालन करेंगे, तो हमें सफलता अवश्य मिलेगी।
डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि आज के छात्र शॉर्टकट से सफलता पाना चाहते हैं, जबकि डॉ. राधाकृष्णन ने हमेशा कड़ी मेहनत और संघर्ष से सफलता प्राप्त की। उनकी कड़ी मेहनत और प्रयास से ही शिक्षा का मिशन फला-फूला। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ समाज के क्षेत्र में भी ईमानदारी से उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने राजनीति, समाज और शिक्षा के मिशन को स्वच्छ बनाने के लिए महान कार्य किए।
डॉ. जयवीर सिंह राणा ने कहा कि डॉ. कृष्णन ने छोटी उम्र में ही बाइबल का अध्ययन भी किया था। वे कई विश्वविद्यालयों के कुलपति रहे और उन्होंने हमें सिखाया कि हम ईमानदारी से कैसे काम कर सकते हैं। एक शिक्षक एक आदर्श होता है, लेकिन जब हम आज के परिवेश को देखते हैं, तो हमें एहसास होता है कि आज जाति, समुदाय, धर्म और राजनीति ने व्यक्ति को कमजोर बना दिया है। पहले शिक्षकों का बहुत सम्मान किया जाता था और हम उनसे बहुत कुछ सीखते थे, लेकिन आज ऐसा माहौल गायब हो गया है।
प्रो रेशमा परवीन ने कहा कि आज हम जिस परिवेश में रह रहे हैं, उसमें एक आदर्श व्यक्ति की बहुत आवश्यकता है और आज का विषय एक ऐसे शिक्षक से जुड़ा है जिससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षाएँ आज भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
प्रो सगीर अफराहीम ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जब हम डॉ. राधाकृष्णन जैसे आदर्श व्यक्तित्व को देखते हैं, तो हमें बहुत गर्व होता है और जब हम अपने कार्यों को देखते हैं, तो हमें बहुत शर्म आती है। डॉ. राधाकृष्णन को जो सम्मान मिला है, वह किसी संत, सूफी या साधु जैसा है। हमें उनका अनुसरण करना चाहिए। उनका एक पत्र हमारी रचनाओं से कहीं बढ़कर है। वह चाहते थे कि हम अच्छी शिक्षा प्राप्त करें। लेकिन दुर्भाग्य से आज हमारे बीच पूर्वाग्रह बढ़ रहा है, अगर हम राधाकृष्णन जैसे नहीं बन सकते, तो उनके शिष्यों जैसे बनें। हमें डॉ. राधाकृष्णन जैसा महत्वपूर्ण कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर डॉ. जयवीर सिंह राणा ने "सामाजिक सुधार एवं डॉ. सर्व पल्ली राधाकृष्णन", डॉ. महिपाल सिंह ने "वर्तमान युग में डॉ. राधाकृष्णन के अर्थ", डॉ. सरिल गोरान ने "डॉ. राधाकृष्णन की शैक्षिक सेवाएं" तथा डॉ. सरवेज अली, देवबंद ने "डॉ. राधाकृष्णन के शैक्षिक विचार" पर अपने उत्कृष्ट लेख प्रस्तुत किये।कार्यक्रम में फरहत अख्तर, सैयदा मरियम इलाही, शाहे ज़मन, मुहम्मद शमशाद समेत अनेक छात्र जुड़े रहे।


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