आर्थराइटिस जानना है जरूरी
वर्ल्ड आर्थराइटिस डे - 12th अक्टूबर 2022
युवाओं की हड्डियों को प्रभावित कर रही खराब जीवनशैली
12 अक्टूबर मेरठ : भारत में आर्थराइटिस के मरीजों की संख्या करीब 18 करोड़ है, जिसमे से लगभग 15 करोड़ को घुटनो की समस्या है शरीर मे कैल्शियम और विटामिन डी की कमी होने के कारण इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है जिसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती, यह परेशानी खासकर ऑफिस जाने वाले लोगों में ज्यादा देखी जाती है। वे अक्सर जोड़ों के दर्द, सूजन या अकड़न की समस्या से परेशान रहते हैं।
वर्ल्ड आर्थराइटिस दिवस के मौके पर मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, वैशाली में ऑर्थोपेडिक एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अखिलेश यादव ने कहा आर्थराइटिस शरीर के 15 मुख्य अंगो को नुकसान पहुंचाती है। इसमें हड्डियों में ऑस्टियोपोरेसिस, मसल्स में कमजोरी, सेल्स डैमेज, आँखों में रूखापन, आँखों में लालपन, आँखों में दर्द और धुंधलापन, खून में कमी, निमोनिया, हार्ट अटैक और स्ट्रोक आदि जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। “आर्थराइटिस की समस्या बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी आम हो गई है। युवाओं में आर्थराइटिस की समस्या स्टेरायड, सप्लीमेंट, कैल्शियम की कमी और गलत खान-पान के कारण हो रही है। इसके अलावा बैठने की गलत आदतें व एक्सरसिज करने का गलत तरीका भी इसका एक बड़ा कारण है। मूल रूप से ओस्टियोआर्थराइटिस आर्थराइटिस का ही एक रूप है जो कि उम्र के बढने पर अधिक पाई जाती है लेकिन रूमेटॉयड आर्थराइटिस किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। जिसमें आपका इम्यून सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, इसके सामान्य लक्षणों में शामिल है जोड़ों में सूजन, सुबह उठने पर उनमें अकड़न, दर्द जो खत्म नहीं होता-या कई हफ्तों तक बना रहता है आदि”।
डॉक्टर अखिलेश यादव ने आगे बताया कि, “जोड़ों का सबसे बड़ा कारण है उठने-बैठने का गलत तरीका। ज्यादातर लोग आलथी-पालथी मार के बैठते हैं, जिससे जोड़ों पर जोर पड़ता है। आर्थराइटिस से बचने के लिए पैरों को मोड़कर बैठने से बचें। धूम्रपान न करें और भारतीय शौंचालय के इस्तेमाल से बचें। पोष्टिक आहार की मदद से इस बीमारी से बचा जा सकता है। आर्थराइटिस की समस्या होने पर शुरुआती चरण में दवाइयों के साथ फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है।


No comments:
Post a Comment