टीबी मरीजों को खोजने की मुहिम हुई तेज “पायलट प्रोजेक्ट” के तहत लैब पहुंचाए जा रहे सैंपल

जिले में 30 दिनों तक जारी रहेगा “पायलट प्रोजेक्ट”

पहले भी बेहतर कार्य के लिए विभाग को किया जा चुका है सम्मानित


मुजफ्फरनगर, 17 अक्टूबर 2022।टीबी को वर्ष 2025 तक जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले में टीबी को लेकर एक नई मुहिम शुरू की गई है, जिसके तहत  30 दिनों तक एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया है। इसकी शुरुआत 13 अक्टूबर से हुई है।  इसका उद्देश्य टीबी मरीज के बलगमके सैंपल को जल्द से जल्द लैब तक पहुंचाना है, ताकि जल्द से जल्द उसकी जांच की जा सके। यदि रिजल्ट पॉजिटिव आता है तो संबंधित मरीज का इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सके। बता दें कि जिला क्षय रोग विभाग को पहले भी बेहतर कार्य के लिए ब्राज मैडल से सम्मानित किया गया है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद गुप्ता ने बताया - जिले में टीबी मरीजों को खोज कर जल्द से जल्द इलाज कराए जाने के उद्देश्य से “पायलट प्रोजेक्ट” चलाया गया है। यह प्रोजेक्ट 30 दिनों तक चलेगा, जिसके तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से टीबी मरीजों के लिए गए सैंपल को ट्रांसपोर्ट के माध्यम से जल्द से जल्द लैब तक पहुंचाया जाएगा। इसकी रिपोर्ट प्रतिदिन जिला स्तर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी को भेजी जाएगी। इसके लिए विभाग की टीम तत्परता से कार्य कर रही है।

क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के जिला समन्वयक सहबान उल हक ने बताया- जिले में चार दिनों से चल रहे पायल प्रोजेक्ट के तहत अब तक 95 सैंपल ट्रांसपोर्ट के माध्यम से लैब तक पहुंचाए गए हैं। इस कार्य में नौ टीम लगी हैं। उन्होंने बताया - फिलहाल जिले में 6505 मरीजों का इलाज चल रहा है। 1524 मरीज ठीक हो चुके हैं।

जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर प्रवीन कुमार ने बताया- यदि किसी को दो हफ्ते या उससे अधिक समय से लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम और बलगम के साथ खून आन, वजन का घटना व भूख कम लगना, लगातार बुखार रहना, सीने में दर्द होना टीबी रोग के लक्षण हैं। इन लक्षणों वाले लोग क्षय रोग केन्द्र पर टीबी की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा- साधारण टीबी का उपचार कम से कम छह माह तक लगातार चलता है। कोई भी मरीज बिना चिकित्सक की सलाह के दवा बीच में न छोड़े, दवा बीच में छोड़ने से टीबी बिगड़ जाती है।

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