बोले- राम मंदिर के नाम पर घोटाला करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
नई दिल्ली । राज्यसभा सदस्य एवं आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने प्रभु श्रीराम के मंदिर के नाम पर हुए करोड़ों रुपए के घोटाले पर प्रधानमंत्री से कई सवालों का जवाब मांगा है। उन्होंने पीएम से पूछा है कि घोटाला करने वाले भाजपा और ट्रस्ट के लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, क्या प्रधानमंत्री की संवेदनाएं समाप्त हो चुकी है? पीएम की ट्रस्ट के लोगों के साथ जो बैठक हुई, क्या उसमें उन्होंने पूछा कि यह घोटाला क्यों किया और प्रभु श्रीराम का मंदिर क्यों नहीं बन पा रहा है? उन्होंने कहा कि भाजपा के मेयर के रिश्तेदार रवि मोहन तिवारी ने जिस सुल्तान अंसारी, हरीश पाठक व कुसुम पाठक से मिलकर 18 मार्च को 2 करोड़ की जमीन ट्रस्ट को 18.50 करोड़ में बेची थी, बाद में उसने उन्हीं की पार्टनरशिप में 19 अप्रैल को 10 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है। संजय सिंह ने कहा कि मैंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भाजपा नेताओं और ट्रस्ट के लोगों के घोटाले व भ्रष्टाचार से संबंधित कागजात देने के लिए पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा है। हिंदूवादी संगठन होने का दावा करने वाले आरएसएस प्रमुख को इस मुद्दे पर अपना पक्ष देश के सामने सार्वजनिक करना चाहिए। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने आज पार्टी मुख्यालय में महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के प्रधानमंत्री ने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण में जो ट्रस्ट काम कर रहा है, उन लोगों के साथ एक बैठक की है। मैं पिछले कई दिनों से लगातार एक नहीं, कई साक्ष्य मीडिया के माध्यम से देश की जनता के सामने रख चुका हूं कि किस तरह से भाजपा वालों ने प्रभु श्रीराम के मंदिर की जमीन में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार और घोटाला किया है। पिछले डेढ़ साल से अगर प्रभु श्रीराम का मंदिर आयोध्या में नहीं बन पा रहा है, अगर प्रभु श्रीराम मंदिर के निर्माण का काम रुका हुआ है, तो उसके लिए कोई और नहीं, बल्कि बीजेपी वाले जिम्मेदार हैं, उनकी चंदा चोरी जिम्मेदार है। उनकी नियत प्रभु श्रीराम का मंदिर बनाने में नहीं, बल्कि चंदा चोरी में है। उनकी आस्था प्रभु श्रीराम में नहीं है, उनकी आस्था प्रॉपर्टी डीलर्स में है। हमें जानकारी मिली है कि इसका पैसा ऊपर तक जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछते हुए कहा कि इस घोटाले का खुलासा करते हुए 10 से 12 दिन हो गए। इसके अनेक साक्ष्य आ चुके हैं। जब आप इनसे मीटिंग कर रहे हैं, तो क्या आपने इनसे सवाल किया कि डेढ़ साल में प्रभु श्रीराम के मंदिर की नींव अभी तक क्यों नहीं भर पाए? ऊपर तक अगर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का हिस्सा जा रहा है, तो किसको-किसको जा रहा है? कितने बीजेपी वाले और कितने ट्रस्ट वाले इसमें शामिल हैं। ट्रस्ट वालों की मिलीभगत से बीजेपी वालों ने इतनी चंदा चोरी की कि प्रभु श्रीराम के मंदिर का निर्माण पूरी तरह से रुक गया है। दिन-रात उनका दिमाग जमीन के नाम पर चंदा चोरी करने में लगा हुआ है। देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर चोट और गहरा आघात पहुंचाने का काम भाजपा और ट्रस्ट के लोगों ने किया है। इसलिए आज प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए, प्रधानमंत्री को इन लोगों से पूछना चाहिए कि घोटाला किया, तो क्यूं किया? रामजी का मंदिर नहीं बन रहा है, तो क्यों नहीं बन पा रहा है? ऊपर तक हिस्सा जा रहा है, तो कहां -कहां तक जा रहा है और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं? इस तरह से अगर डेढ़ साल से सिर्फ चंदा चोरी में इनका दिमाग लगा हुआ है, तो देश की जनता समझ सकती हैं कि ये प्रभु श्रीराम का मंदिर बनाने के लिए काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि भ्रष्टाचार और लूट करने के लिए काम कर रहे हैं। -ट्रस्ट को हमेशा मालियत से कई गुना महंगी जमीन मिलती है, लेकिन भाजपा के लोगों को हमेशा लागत से कम मूल्य पर जमीन मिलती है राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि जैसा कि मैंने पहले बताया है कि किस तरह से 5 मिनट में दो करोड़ रुपए कीमत की जमीन 18.50 करोड़ रुपए की हो गई, किस तरह से प्रति सेकंड 5.50 लाख रुपए और प्रति मिनट 3.30 करोड़ रूपए जमीन महंगी हो गई। हमने बताया कि किस तरीके से 20 लाख की जमीन 2.50 करोड़ रुपए में बेच दी गई और बीजेपी वालों ने यह भ्रष्टाचार किया। इसका प्रमाण जब मैंने देश के लोगों के सामने रखा, तो मन में एक सवाल उठता था कि यह पैसा जा कहां रहा है? किसने- किसने इस पैसे में खेल किया। यह पैसा जो आया, वह किसके-किसके पास गया। इस संबंध में एक अन्य कागजात दिखाते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के मेयर के रिश्तेदार रवि मोहन तिवारी ने 18 मार्च को बीजेपी के मेयर और ट्रस्ट वालों के साथ मिलकर 2 करोड़ रुपए की जमीन 18.50 करोड़ रुपए में सुल्तान अंसारी के साथ बेचता है। उस रवि मोहन तिवारी ने 19 अप्रैल को 10 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी। मजेदार बात यह है कि ट्रस्ट जब भी जमीन खरीदता है, उसको मालियत से कई गुना महंगी जमीन मिलती है, लेकिन भाजपा के लोग जब जमीन खरीदते हैं तो इनको हमेशा लागत से कम मूल्य पर जमीन मिलती है। इस जमीन की लागत 8.70 करोड़ रुपए है और इनको 10 करोड़ रुपए में आराम से मिल गई। इनको यह जमीन 2, 3 या 4 गुना दाम पर नहीं मिली, इनको मालियत से थोड़ा ज्यादा में मिली। संजय सिंह ने कहा कि इस जमीन खरीद में रवि मोहन तिवारी का पार्टनर सुल्तान अंसारी, हरीश पाठक और कुसुम पाठक हैं। यानि कि जिस हरीश पाठक और कुसुम पाठक के साथ मिलकर वह ट्रस्ट को 18.50 करोड़ रुपए में जमीन बेचता है, बाद में उन्हीं हरीश पाठक, कुसुम पाठक और सुल्तान अंसारी के साथ मिलकर 10 करोड़ रुपए की जमीन 19 अप्रैल को खरीद रहा है। यह लोग अपनी संपत्ति बना रहे हैं। यह लोग प्रभु श्रीराम का मंदिर बनाने गए थे, लेकिन अपनी संपत्ति बनाने में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि रवि मोहन तिवारी ने जो जमीन खरीदी है, वह जमीन विवादित थी। इस जमीन के ऊपर बड़े-बड़े बोर्ड लगे हुए हैं। जब यह जमीन इन लोगों ने खरीदी, तो इनके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज हो गई। आज की तारीख में बीजेपी के मेयर का रिश्तेदार रवि मोहन तिवारी और उसके साथ कुसुम पाठक, हरीश पाठक इसमें नामजद हैं। संजय ने एक और मामले का खुलासा करते हुए कहा कि एक और जमीन हरीश पाठक के भाई अनिल से खरीदी जाती है। इस जमीन को बीजेपी के मेयर के अकाउंटेंट विष्णु कुमार खरीदते हैं। विष्णु कुमार 15 मार्च को हरीश पाठक के भाई अनिल से 255 वर्ग मीटर जमीन 10 लाख रुपए में खरीदतें हैं और इसमें बीजेपी के मेयर का भांजा दीप नारायण उपाध्याय गवाह बनता है। इसके बाद यही जमीन ट्रस्ट को 3 दिन के बाद 18 मार्च को 60 लाख रुपए में बेच दी जाती है। इसमें भी ऋषिकेश उपाध्याय और अनिल कुमार मिश्रा गवाह हैं। -मैंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भाजपा नेताओं और ट्रस्ट के लोगों के घोटाले व भ्रष्टाचार से संबंधित कागजात देने के लिए समय मांगा है आम आदमी पार्टी का कहना है कि जब आपको यह भी पता चल गया कि जो कमाई वहां से हुई, उस कमाई को कैसे हरीश पाठक और कुसुम पाठक ने मिलकर रवी मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के साथ मिलकर 10 करोड़ रुपए की संपत्ति बना ली है? इतनी सारी जानकारी मिल गई है। क्या इस देश में सारी जांच एजेंसियां मर चुकी हैं? क्या इस देश की सारी एजेंसियां खत्म हो चुकी हैं? क्या इस देश के प्रधानमंत्री की संवेदनाएं पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं? प्रभु श्रीराम के मंदिर के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला बीजेपी वाले ट्रस्ट के साथ मिलकर कर रहे हैं और अभी तक इस पर कहीं कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसीलिए मैंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को चिट्ठी लिख कर उनसे मिलने का समय मांगा है। मैं उनको भाजपा नेताओं और ट्रस्ट के लोगों के घोटाले व भ्रष्टाचार से संबंधित सारे कागजात देना चाहता हूं। आरएसएस प्रमुख अपने आप को हिंदूवादी संगठन होने का दावा करते हैं। मेरी मांग है कि वह इसका संज्ञान लें और इस पर उनका क्या पक्ष है, यह देश के सामने सार्वजनिक करना चाहिए। ऐसे करोड़ों राम भक्तों को ठगा नहीं जा सकता है और ऐसे उनकी आस्था को चोट नहीं पहुंचाई जा सकती है।
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