जैसी करनी वैसी भरनी वाली कहावत भाजपा के समक्ष
संजय वर्मा
मेरठ । त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में भाजपा को जोर का झटका धीरे लगा है। उसके समक्ष जैसी करनी वैसी भरनी वाली कहावत साबित होती दिखाये दे रही है। जिले में जिला पंचायत के चुनाव में बसपा.सपा.रालोद ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी है। 33 में से 23 सीटों पर बसपा.सपा.रालोद को बढ़त मिली है। एक सीट पर आप भी खाता खोलने की ओर है। वहीं भाजपा के खाते में मुश्किल से पांच सीट आते हुए दिख रही है। हस्तिनापुर.सरधना.सिवालखास में तो भाजपा का सफाया ही हो गया है। किठौर विधानसभा क्षेत्र में मुश्किल से भाजपा की प्रतिष्ठा बचते हुए दिख रही है। वहीं, भाजपा के पंचायत चुनाव प्रभारी संजीव जैन सिक्का ने कहा कि कुछ कमियां रही हैं। संगठन स्तर पर विचार किया जाएगा। वहीं रालोद के क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी यशवीर संह ने कहा कि भाजपा का जनता ने सफाया कर दिया है।यही स्थिति अगले साल होने वाले विधान सभा में होनी है। जनता अब पूरी तरह भाजपा की चाल का समझ चुकी है।
मेरठ में रालोद व बसपा की लगी लाटरी
पंचातय चुनाव की मतगणना आज तीसरे दिन भी जारी है। अभी गांव की सकरकार बनाने का फैसला नहीं हो पाया है। वहीं दो दिनों में आए परिणाम के नतीजों में कोई अपनी जीत की खुशी जाहिर कर रहा है तो कोई हार पर गुणागणित बैठाने में जुटा हुआ है। हालाकि इसके इतर मतगणना में अभी कई जिला पंचायत सदस्य से लेकर गांव के प्रधानों के परिणाम नहीं आए हैं। जिला पंचायत सदस्?य में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद दबदबा बना हुआ है तो वहीं भाजपा को नुकसान हुआ है। इसके अलावा किसान आंदोलन का फायदा बसपा को भी मिला है।
मेरठ में रालोद व बसपा की जीत सोमवार देर रात तक मिलें आकड़ों और रुझानों के मुताबिक भाजपा समर्थित छह प्रत्याशी या तो जीत चुके थे या फिर जीतने की स्थिति में थे। रालोद समर्थित सात प्रत्याशी जीत के आसपास थे। सबसे ज्यादा बसपा समर्थित 9 प्रत्याशी जिला पंचायत जाने की तैयारी में थे। उन्हें सबसे ज्यादा वोट मिली। सपा समर्थित चार प्रत्याशी सबसे आगे थे। चुनावी जानकारों की माने तो कृषि कानूनों का विरोध तथा भाजपा के प्रति किसानों में भरा गुस्सा पंचायत चुनाव में बाहर आकर दिखाई दिया। यही कारण था कि जिस वार्ड में रालोद प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी को हराने की स्थिति में नहीं था वहां उन्होंने बसपा अथवा सपा समर्थित प्रत्याशी को वोट दे दिया। जिससे वे जीत गए लेकिन भाजपा का समर्थन प्राप्त प्रत्याशी हार गए। पंचायती चुनाव में जिस तरह बसपा ने बिना मेहनत किये इतनी सीट प्राप्त की है। अगर थोडी सी मेहनत बसपा की मुखिया की ओर से हो जाती तो स्थिति कुछ ओर ही होती।
भाजपा के विधायक अपने अपने प्रत्याशियों के जीत केा किया था दावा जो हुआ फूस
भाजपा की ओर से जब जिला पंचायत के सभी 33 वार्डो के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की गई थी तो विधायकों ने अपने.अपने टिकट होने का दावा किया था। प्रभारी संजीव जैन सिक्का ने कहा था कि 33 में से 25 से 28 सीट पर जीत तो तय है, लेकिन रविवार से लेकर सोमवार की रात हुए मतगणना में भाजपा को करारा झटका लगा है। हस्तिनापुर, मवाना, दौराला.सरधना, जानी.सरुरपुर.रोहटा में तो भाजपा की फजीहत हो गई। हस्तिनापुर.मवाना.परीक्षितगढ़,दौराला में तो भाजपा का खाता भी खुलने की स्थिति नहीं रही। हस्तिनापुर का वार्ड.1 पर सबसे पहला परिणाम घोषित हुआ। सपा के पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री मुकेश सिद्धार्थ की पत्नी कुसुम सिद्धार्थ को निर्वाचित घोषित कर विपक्ष का खाता खुल गया। वार्ड.2 पर भी सपा की मुनेश ने जीत दर्ज की। वार्ड.3 और 4 पर भी रालोद ने जीत दर्ज कर धमाका कर दिया। इसके बाद तो भाजपा के तेजतर्रार प्रत्याशी भी तीसरे.चौथे नंबर पर आते दिखे। वार्ड.20 में तो कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी को पहले बढ़त दिखाई गई। बाद में आरोप है कि विधायक के दबाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी को बढ़त मिलना बताया गया। कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं ने खूब हंगामा किया, लेकिन कोई सुनवाई हुई। देर रात १२.40 बजे वार्ड.20 से भाजपा समर्थित प्रत्याशी प्रदीप कुमार उर्फ गुड्डू गगोल को निर्वाचित घोषित कर दिया गया। वैसे जिला पंचायत में बसपा.सपा और रालोद ने धमाकेदार जीत दर्ज की है।
मतगणना के रूझान के अनुसार रात एक बजे तक बसपा जिला पंचायत के नौ वार्डों में आगे चल रही है। वहीं सपा सात, रालोद छह में आगे है। एक में आप भी जीतने की ओर है। वहीं भाजपा को मुश्किल से पांच सीट ही मिलती दिख रही है। पांच अन्य पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे हैं। भाजपा के लिये यह सबक है खाली हवाबाजी से कोई काम नहीं होता है। जमीन पर कार्य करने से सफलता मिलती है।
ये है स्थिति
रूझानों के अनुसार
बसपा 09
सपा 07
रालोद 06
भाजपा 05
आप 01
निर्दलीय 05



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