आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में उमड़ा आस्था का महासागर, शतचंडी होम से गूंजा वैदिक परंपरा का संदेश

: नवरात्रि महोत्सव में जुटे लाखों श्रद्धालु, पहली बार दर्शन के लिए रखे गए मूल सोमनाथ शिवलिंग के 176 पवित्र अवशेष; नौ दिनों में सात लाख लोगों के लिए तैयार हुआ भोजन

बेंगलुरु। वैदिक मंत्रों की गूंज, हवन की सुगंध और श्रद्धा से सराबोर लाखों श्रद्धालु। आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में नवरात्रि महोत्सव के दौरान भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। वैश्विक आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की उपस्थिति में आयोजित दस दिवसीय उत्सव का प्रमुख आकर्षण शतचंडी होम रहा। इस दौरान देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, ध्यान और सेवा गतिविधियों में भाग लिया।

शतचंडी होम बना महोत्सव का मुख्य आकर्षण

नवरात्रि के दस दिवसीय आयोजन में शतचंडी होम को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया। नौ दिनों तक आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए सात लाख भोजन तैयार कर परोसे गए। आयोजकों के अनुसार, बेंगलुरु स्थित केंद्र के अलावा दुनिया भर के 171 आर्ट ऑफ लिविंग केंद्रों में भी नवरात्रि मनाई गई।

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने नवरात्रि के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह उत्सव ब्रह्मांड की विविधता, उसके मूल स्रोत और जीवन के लक्ष्य का उत्सव है। उनके अनुसार, पूजा से उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा कल्याण की भावना बढ़ाती है, आत्मबोध के करीब ले जाती है और सांसारिक जीवन में सफलता पाने में भी सहायक होती है।

पहली बार दर्शन के लिए रखे गए सोमनाथ शिवलिंग के 176 अवशेष

इस वर्ष के आयोजन का विशेष आकर्षण मूल सोमनाथ शिवलिंग के 176 पवित्र अवशेषों के दर्शन रहे। आयोजकों के अनुसार, इन अवशेषों को पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया। मान्यता है कि करीब एक हजार वर्ष पहले महमूद गजनवी के आक्रमणों के दौरान मूल शिवलिंग को क्षति पहुंचाई गई थी। इन अवशेषों के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अनुभव किया।

67 से अधिक देशों के श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

नवरात्रि महोत्सव में 67 से अधिक देशों से लोग बेंगलुरु आश्रम पहुंचे। श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक साधना, ध्यान और सेवा कार्यों में भाग लिया। विशेष मौन कार्यक्रमों में हजारों लोगों ने हिस्सा लेकर ध्यान के माध्यम से आंतरिक शांति और आत्मचिंतन का अनुभव किया।

अर्जेंटीना से आए श्रद्धालुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। सेलीना ने बताया कि आश्रम में ध्यान, नृत्य और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से उन्हें नई ऊर्जा और प्रसन्नता का अनुभव हुआ। अर्जेंटीना के मारियानो ने कहा कि वह यहां से मिली शांति को दुनिया के साथ साझा करने के संकल्प के साथ लौटेंगे। वहीं, बेंगलुरु के एक स्वयंसेवक ने सेवा कार्यों को अपने जीवन का नया अनुभव बताया।

लाखों की भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं रहीं सुचारु

आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद भीड़ प्रबंधन और आवागमन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। सेलीना ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि लाखों लोगों के जुटने के बाद भी आयोजन सुव्यवस्थित रहा और श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने का अवसर मिला।

ऋषि होम के साथ वैदिक परंपरा का संदेश

महोत्सव के दौरान ऋषि होम का भी आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान उन प्राचीन ऋषियों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए किया जाता है, जिन्होंने वेदों के ज्ञान को संरक्षित कर आगे बढ़ाया। इसके माध्यम से गुरु परंपरा के प्रति आभार व्यक्त करने और सभी के कल्याण की कामना की गई।

नवरात्रि महोत्सव ने धार्मिक अनुष्ठानों, ध्यान, सेवा और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से विश्वभर से आए श्रद्धालुओं को एक मंच पर जोड़ने का संदेश दिया।

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