1458 गर्भवतियों की जांच में 118 हाई रिस्क, समय रहते पहचानी गई जटिल गर्भावस्थाएं

पीएमएसएमए अभियान में दूसरी-तीसरी तिमाही की महिलाओं पर विशेष फोकस, 109 गर्भवतियों को उच्च चिकित्सा केंद्रों पर किया गया रेफर

मेरठ। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित विशेष जांच अभियान में 1458 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जांच के दौरान 118 महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में चिन्हित हुईं। जटिल गर्भावस्था के लक्षण मिलने पर 109 महिलाओं को बेहतर उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर किया गया।

ब्लड प्रेशर से लेकर हीमोग्लोबिन तक हुई जांच

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि पीएमएसएमए का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। अभियान के दौरान गर्भवतियों का ब्लड प्रेशर, ब्लड, यूरिन, हीमोग्लोबिन सहित आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण किए गए।

दूसरी और तीसरी तिमाही की महिलाओं पर विशेष निगरानी

एनएचएम के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि योजना के तहत पात्र गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

जिला सलाहकार मातृ स्वास्थ्य इलमा अजीम ने बताया कि पीएमएसएमए दिवस पर गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में पहुंच चुकी महिलाओं की विशेष निगरानी की जाती है। इसका उद्देश्य हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय रहते पहचान कर उपचार और चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करना है। महिलाओं को परिवार नियोजन के संबंध में भी आवश्यक काउंसलिंग दी गई।

समय पर पहचान से कम होगा मातृ-शिशु जोखिम

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार, जटिल गर्भावस्था की समय रहते पहचान और उचित उपचार से गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।

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