दानदाताओं से एसआईटी ने पूछा किसी कर्मचारी को दिए थे आभूषण व नकदी 

 चांदी की ईंट देने वाले कारोबारी ने सच्चाई बताई

अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की परते धीरे -धीरे सामने आ रही है। एसआरटी भी फूंक -फूंक कर कदम रख रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम  अब ऐसे दानदाताओं से संपर्क कर रही है, जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट के किसी कर्मचारी को जेवर सौंपे थे। SIT अपनी रिपोर्ट में ये फैक्ट शामिल करेगी कि कब और किसके हाथों में जेवर सौंपे गए। कोई रसीद दी गई थी या नहीं।

एसआईटी ने मुंबई के एक कारोबारी अनिल विश्वकर्मा के बयान दर्ज किए। कारोबारी का आरोप है, ‘हमने रामलला के लिए 3 किलो चांदी का हार और 1 किलो चांदी की चरण पादुका टिन्नू यादव को सौंपी थी, लेकिन मंदिर की तरफ से कोई रसीद नहीं मिली।’इसी तरह, 60 किलो चांदी की ईंट दान करने वाले 'इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन' के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी का कहना है कि उनकी चांदी का भी अब तक कुछ पता नहीं चला। एसआईटी दानदाताओं से अहम जानकारी मिली है। जिसे एसआईटी ने सबूत के तैार पर अपने पास रख लिया है। एसआईटी ने 9 पेन ड्राइव में सबूत एकत्र किए  है। जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सौंपा जाएगा। 

200 किमी नंगे पैर चलकर अयोध्या पहुंचा था कारोबारी परिवार

अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर के महंत आचार्य विनोद मिश्रा ने बताया, 'जौनपुर (मुंगराबादशाहपुर) के रहने वाले अनिल विश्वकर्मा मुंबई के बड़े कारोबारी और हमारे शिष्य हैं। उन्होंने रामलला को चांदी का हार और चरण पादुका चढ़ाने का संकल्प लिया था। महीन कारीगरी से बना चांदी का हार करीब 3 किलो का और 64 दिव्य चिह्नों वाली चरण पादुका लगभग 1 किलो वजन की थी।'‘पूरा परिवार महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ 29 अक्टूबर, 2025 को 200 किलोमीटर नंगे पैर पैदल चलकर भजन-कीर्तन करते हुए अयोध्या पहुंचा था। बच्चों के पैरों में छाले पड़ गए थे। इसके बावजूद उनके चेहरों पर मुस्कान थी।’ बोले 'परिवार सबसे पहले मेरे आश्रम आया, जहां दोनों वस्तुओं का पूजन हुआ। फिर परिवार इन्हें थाल में सजाकर, सिर पर रखकर रामलला के दरबार पहुंचा था। मैं भी उनके साथ गया था। गेट पर हमें रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव मिला, जो VVIP रास्ते से हमें सीधे गर्भगृह ले गया। वहां पुजारियों ने कुछ देर के लिए उन वस्तुओं को प्रभु के चरणों में रखा और फिर टिन्नू ने उन्हें अपने पास रख लिया।'

टिन्नू बोला- 'भाई साहब' को दिखाने के बाद मिलेगी रसीद

जब पीड़ित परिवार ने हार पहनाए जाने की तस्वीर और चढ़ावे की रसीद मांगी, तो टिन्नू ने बहाना बनाया। उसने कहा, 'पहले बैंक के अधिकारी हार की शुद्धता जांचेंगे, फिर इसे प्रभु को पहनाया जाएगा। तब आपको सूचना देकर फोटो-वीडियो उपलब्ध करा देंगे।' रसीद के सवाल पर उसने कहा कि एक बार 'भाई साहब' (ट्रस्ट महासचिव चंपत राय) देख लें, फिर रसीद मिल जाएगी।

महंत विनोद मिश्रा ने आरोप लगाया, 'ट्रस्ट ने न तो कभी हार पहनाया और न ही परिवार को कोई सूचना दी। जब भी मैं टिन्नू से रसीद मांगता, वह टालमटोल करता। बाद में उसने दावा किया कि दोनों आभूषणों को बंगाल भेजकर गलवा दिया गया है और उनकी ईंटें बनवा दी गई हैं। ताकि जरूरत के अनुसार भगवान के बर्तन बनाए जा सकें। इस धांधली की खबर सुनकर श्रद्धालु परिवार बेहद आहत है।’

60 किलो चांदी की ईंटों का भी कुछ पता नहीं

राम मंदिर निर्माण के समय दान देने वाले भी अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। 'इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन' के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने बताया, ‘देशभर के सर्राफा कारोबारियों ने हमारे पास 10-10, 20-20 ग्राम चांदी भिजवाई थी। कुल 60 किलो चांदी इकट्‌ठा हुई थी। इसे गलाकर 1 से सवा किलो वजन की चांदी की ईंटें तैयार की गईं। इन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र लिखे थे। इसके अलावा ऋषिकेश एसोसिएशन की तरफ से 1 किलो चांदी का कलश भी भेजा गया था।'

अनुराग रस्तोगी के अनुसार, ‘20 जुलाई, 2020 को चंपत राय की सहमति के बाद हम चांदी की ईंटें लेकर अयोध्या रामकचहरी पहुंचे। वहां अध्यक्ष शशिकांत दास ने डेढ़ घंटे पूजन कराया। वहां चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और कैशियर प्रकाश गुप्ता भी मौजूद थे। डॉ. अनिल मिश्रा और प्रकाश गुप्ता ने इस भेंट को स्वीकार करके शुद्धता प्रमाण पत्र के साथ इसकी रसीद भी दी थी। हमारा अनुरोध था कि इन्हें नींव पूजन के समय इस्तेमाल किया जाए।'

चांदी की अखंड ज्योति और भोग के कटोरे भी 'गायब'

अनुराग रस्तोगी ने व्यक्तिगत रूप से 1-1 किलो चांदी के दो दीपक, दो कटोरे, 200 ग्राम की पंचधातु की सिल्ली और नाग-नागिन का जोड़ा दान किया था। रस्तोगी ने बताया, 'चांदी के एक दीपक में डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी ने अखंड ज्योति जलाई थी। जब पीएम नरेंद्र मोदी ने रामलला को साष्टांग प्रणाम किया था, उस वक्त तस्वीरों में वह चांदी की अखंड ज्योति साफ दिख रही थी। लेकिन भव्य मंदिर बनने के बाद न तो वह दीपक वहां दिखा और न ही भगवान को भोग लगाने के लिए दिए गए चांदी के कटोरे।'

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