पूर्व डीआईजी प्रेम प्रकाश का बीजेपी से हुआ मोहभंग
चन्द्रशेखर की पार्टी असपा का थामा दामन
लखनऊ। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गयी है। यूपी कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश ने भारतीय जनता पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया है। अब उन्होंने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की उपस्थिति में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राजनीतिक गलियारों में ये अटकलें लगाई जा रही है कि प्रेम प्रकाश पश्चिमी यूपी की किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं।
बता दें कि प्रेम प्रकाश प्रयागराज में एडीजी के पद से रिटायर हुए हैं। अपने रिटायरमेंट के कुछ महीनों बाद ही 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बीजेपी जॉइन की थी। उस समय डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। हालांकि बीजेपी से कुछ दिन बाद इनका मोह भंग हो गया। वह कभी बीजेपी के किसी कार्यक्रम में सक्रिय नहीं रहे।
2027 में लड़ूंगा चुनाव: प्रेम प्रकाश
प्रेम प्रकाश ने कहा कि वह 2027 में यूपी चुनाव लड़ेंगे। वह आजाद समाज पार्टी को पूरे देश में मजबूत करने लिए अभियान चलाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक ये मानते हैं कि पश्चिमी यूपी में आजाद समाज पार्टी को इनके साथ आने से मजबूती मिलेगी।
मायावती के करीबी अफसरों में होती थी गिनती
प्रेम प्रकाश का प्रशासनिक और सियासी रसूख काफी पुराना है। वह बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबियों में शामिल रहे हैं। बसपा शासनकाल के दौरान वह यूपी के कई महत्वपूर्ण जिलों में बतौर एसपी तैनात रह चुके हैं। अपने तेज तर्रार छवि के कारण तमाम सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
67 एनकाउंटर कर चुके हैं
पूर्व IPS प्रेम प्रकाश को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट माना जाता था। जब प्रेम प्रकाश कानपुर जोन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे उस समय करीब 67 आरोपियों को एनकाउंटर में गिरफ्तार किया गया था। प्रेम प्रकाश ने 2019 में सीएए आंदोलन में अहम जिम्मेदारी निभाई थी।
मुख्तार अंसारी को लेकर निभाई थी जिम्मेदारी
प्रेम प्रकाश ने साल 2019 में CAA/NRC के दंगों के दौरान कानपुर में बड़ी जिम्मेदारी निभाई थी। वहीं, मुख्तार अंसारी को UP के बांदा जेल तक लाए जाने की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा में थे।


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