मेरठ समेत एनसीआर  के 17 जिलों में तीन दिन आज से रहेगा ट्रकों का चक्का जाम

आल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के शीर्ष पदाधिकारियों ने की बैठक

पर्यावरण शुल्क में 40-55% वृद्धि के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का विरोध

मेरठ। दिल्ली एनसीआर में पर्यावरण शुल्क में की गई वृद्धि के विरोध में ट्रांसपोर्टर लामबंद होना शुरू हो गए हैं। दिल्ली सरकार के इस फैसले से शुल्क में 40 से 55 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। जिसका ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर नकारात्मक असर होगा। सोमवार को शहर में दो स्थानों पर आल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के शीर्ष पदाधिकारियों ने बैठक कर 21, 22 और 23 मई को सांकेतिक रूप से ट्रकों का चक्का जाम करने को लेकर बैठक की।

दिल्ली रोड स्थित सांगरिया होटल में आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने दिल्ली सरकार के टैक्स वृद्धि के तुगलकी फरमान का विरोध किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा ने कहा कि देश के सभी प्रदेशों से दिल्ली में आने वाले ट्रकों पर पर्यावरण शुल्क में वृद्धि की जा रही है।

एक नवंबर 2026 से दिल्ली में बीएस-4 कामर्शियल वाहनों पर पूर्णत प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। 21, 22 और 23 मई को एनसीआर में 17 जिलों के ट्रांसपोर्ट व्यापारियों के साथ मिलकर पूर्णता चक्का जाम करेंगे। महामंत्री दीपक गाँधी, कोषाध्यक्ष रोहित कपूर मौजूद रहे।

 ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. हरीश सभरवाल ने कहा कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की सिफारिश के अनुसार जो ट्रक दिल्ली में न तो लोड करते हैं न हीं अनलोड, बल्कि सिर्फ दिल्ली को एक कारिडोर की तरह पार करके दूसरे राज्यों में माल लेकर जाते हैं। उन्हें ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल और एक्सप्रेसवे पर भेजने के लिए इस शुल्क में बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया था।

यह व्यवस्था सिर्फ ट्रांजिट वाहनों पर लागू होनी थी। न कि दिल्ली में सामान लाने ले जाने ले वाहनों पर, जो दिल्ली की अर्थव्यवस्था को सुचारू बनाने और यहां के निवासियों के लिए आवश्यक सामान लाने और ले जाने का कार्य करते हैं। लेकिन सीएक्यूएम और दिल्ली सरकार ने टैक्स वृद्धि बढ़ोतरी सभी वाहनों पर लागू कर दी है। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर चोट करती है। इससे दिल्ली में आने वाली सभी आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन का नकारात्मक असर पड़ेगा।

ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कुलतारण सिंह अटवाल ने कहा पर्यावरण शुल्क हल्के कामर्शियल वाहनों पर 1400 रुपए से बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दिया गया। वहीं भारी वाहनों के लिए यह शुल्क 2600 रुपए से बढ़कर सीधे चार हजार रुपये तक पहुंच गया। इस फैसले को लेकर देश भर के परिवहन संगठनों ने भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और विरोध तेज होने के संकेत भी मिल रहे हैं।

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत चिन्य़ोटी ने कहा कि सरकार 10 साल पुराने ट्रकों पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। जो कि अन्याय पूर्ण है। अगर 10 साल पुराने ट्रकों पर प्रतिबंध लगा तो जितनी भी एनसीआर में शुगर फैक्ट्रियां हैं, सब बंद हो जाएगी। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष पंकज अनेजा ने कहा कि बीएस फोर वाहनों को पर्यावरण टैक्स से पूरी तरह छूट दी जाए। समीर कोहली, राजा शर्मा, शंभू बंसल, संदीप गांधी ने भाग लिया।

  चक्का जाम होने से ट्रकों में तीन दिन सामान ओवर लोड नहीं हो पाएंगे 

 तीन तीन चक्का जाम होने से जहां मेरठ जिले के चार हजार ट्रकों के पहिए जाम हो जाएंगे । वहीं एनसीआर में पचार हजार ट्रकों के पहिए जाम होने के कारण  सामान की ओवर लोडिंग न होने से माल की आवाजाही प्रभावित रहेंगे। तीन दिन की हड़ॅताल होने से करीब 2 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा । अकेले मेरठ में तीन सौ कराेड़ का काराेबार प्रभावित होगा। 

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