डीएम ने बाढ़ स्टेयरिंग ग्रुप तथा हीटवेव के संबंध में की बैठक
सभी विभागों से समन्वय करते हुए कार्य योजना बनाने के लिए दिए निर्देश
मेरठ। विकास भवन सभागार में डीएम डा. वी.के. सिंह की अध्यक्षता में बाढ स्टेयरिंग ग्रुप तथा हीटवेव के संबंध में बैठक की गई। बैठक में डीएम द्वारा बाढ से बचाव एवं लू के संबंध में तैयारियो की समीक्षा की गई। उन्होेने सभी विभागों से समन्वय करते हुये कार्य योजना को बनाने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी द्वारा निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिये गये।
डीएम ने कहा कि एक समग्र बाढ़ प्रबन्धन योजना तैयार की जाए। जनपद की भौगोलिक स्थिति व बाढ़ की ऐतिहासिक प्रवृत्ति का आंकलन करते हुये नदी तटों, तटबंधों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर पूर्व तैयारी कर ली जाये। तटबंधों की मरम्मत, जल निकासी चैनलों की सफाई, सिल्ट सफाई इत्यादि कार्य समय से कर लिये जाये। संसाधनों (भौतिक व मानव दोनों)/उपकरणों की सूची का अपडेशन किया जाए। प्रत्येक बाढ़ प्रभावित गांव की स्थानीय जोखिमों, प्राथमिक संपर्क व निकासी मार्गों की सूची, प्रधान/आशा/एएनएम, कोटेदार, लेखपाल, पंचायत सचिव की सूची अपडेट की जाये तथा सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की जाए। ग्राम स्तरीय स्वयंसेवकों की पहचान करते हुये उनका प्रशिक्षण कराया जाये। राहत केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि का चिन्हांकन करते हुये समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं। एंबुलेंस, प्राथमिक उपचार किट, मोबाइल मेडिकल टीमों का गठन कर लिया जाये। प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मियों, राहत शिविर संचालकों का तकनीकी प्रशिक्षण करा लिया जाये। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाये। आवश्यक दवाओं, 108/102 एम्बुलेंस एवं 24 घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। सर्पदंश एवं बिच्छू दंश हेतु आवश्यक इंजेक्शन एवं दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था हो। महिला कर्मचारियों के माध्यम से महिलाओं में सैनेटरी नैपकिन का वितरण तथा उचित डिस्पोजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
ड्रेनेज क्लीनिंग, कचरा प्रबंधन, महामारी आदि के नियंत्रण की तैयारी, मच्छरों व वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु कीटनाशक का छिड़काव कराया जाये। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। प्रत्येक 25 व्यक्तियों पर एक शौचालय की व्यवस्था की जाये। महिलाओं एवं पुरुषों के लिए पृथक शौचालय एवं स्नानघर की व्यवस्था हो। शौचालयों की नियमित सफाई सुनिक्षित की जाये। संबंधित विभागों से समन्वय कर बाढ़ शरणालय में मच्छरों व वेक्टरजनित बीमारियों से बचाव हेतु नियमित कीटनाशक दवाइयों, चूना आदि का छिड़काव किया जाये। पशु राहत शिविर में रहने वाले पशुओं को उक्त वर्णित धनराशि के प्राविधान से दिन में न्यूनतम 2 बार चारा-पानी उपलब्ध कराया जाये। पशु कैम्प में रहने वाले पशुओं को प्रतिदिन रजिस्टर में अंकित किया जाये। पशुओं को होने वाले चारा वितरण की दिनांकवार फोटो ली जाये तथा कितना चारा कितने पशुओं को वितरित किया गया, इसका पूर्ण विवरण रखा जाये।
नगर निगम, नगर पालिका/पंचायत को शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो में प्याऊ एवं शीतल जल उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति नियमित रूप से संचालित रहे। मानक के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जाये तथा तारो को चैक करा लिया जाये। सब स्टेशन की सूचना रखी जाये। बाढ राहत के सभी निर्देशो का शत-प्रतिशत पालन किया जाये। आग लगने के बारे में जनजागरूकता तथा आग लगने पर तत्काल राहत कार्य किया जाये। उन्होंने परीक्षितगढ के पास फायर स्टेशन बनाये जाने हेतु जमीन चिन्हित कर प्रस्ताव भेजे जाने के निर्देश दिये। सीएमओ को निर्देशित किया गया कि सभी सीएचसी/पीएचसी पर बाढ के संबंध में पूर्व में ही तैयारी कर ली जाये। लू के दृष्टिगत समस्त व्यवस्थाओ को दुरूस्त रखा जाये। लू से बचाव, उपचार के संबंध में वीडियो बनाकर उपलब्ध कराये, जिससे आमजन को जागरूक किया जा सके। एसडीएम मवाना, सीओ, पीडब्लूडी सिंचाई विभाग के अधिकारी नदी तटो, तटबंधो का निरीक्षण करें तथा जो भी आवश्यक जरूरत है उनको ठीक कराया जाये। राहत बचाव केन्द्रो को पूर्व में ही स्थान चिन्हित करते हुये तैयारी की जाये।
हीटवेव की आपदा से निपटने के आपदा प्रबंधन को जनहित में उपाय करने के दिए निर्देश
डीएम ने हीटवेव (लू) की आपदा से निपटने के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मेरठ द्वारा जनहित में उपाय भी जारी किये। क्या करें-घर से बाहर निकलते समय गमछा टोपी चश्मा एवं छाते का प्रयोग करें, हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहने तथा कड़ी धूप से बचें, पर्याप्त मात्रा में तरल पेय पदार्थ जैसे छांछ, लस्सी, नमक चीनी का घोल, नींबू का पानी एवं आम के पने का सेवन करें। प्यास की इच्छा न होने पर भी पानी बार-बार पियें। निर्जलीकरण से बचने के लिए ओआरएस घोल का प्रयोग करें। यात्रा करते समय पानी हमेशा साथ में रखें। संतुलित हल्का व नियमित भोजन करें। खाना बनाते समय खिड़की, दरवाजे एवं रात को खिड़कियाँ खुली रखें। जिन खिड़कियों और दरवाजों से गर्म हवा आती है उन पर रिफ्लेक्टर जैसे एल्यूमिनियम पत्री गत्ते या काले पर्दे लगायें। वृद्धों, बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखें। अधिक परिश्रम के बीच में आराम भी करें। घर की छत पर चूने/सफेद रंग का पेन्ट करें। जहाँ तक सम्भव हो घर में ही रहें और सूर्य के सम्पर्क से बचे। स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सतर्क रहें। लू लगने के लक्षणों को पहचानें। यदि कमजोरी लगे, सिर दर्द हो, उल्टी महसूस हो, मांसपेशियों में ऐंठन हो और चक्कर आये तो तुरन्त डॉक्टर को दिखायें। लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़ों से पोछेया शरीर के ऊपर पानी का स्प्रे करें। आराम न मिलने पर तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जायें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। जानवरों को छाया में बांधे और उन्हें पर्याप्त पानी पिलायें।
क्या न करे-अधिक गर्म चाय/काफी एवं खराब जैसे पेयपदार्थ का सेवन न करें। अधिक तेज धूप में बाहर न निकलें। अधिक गर्मी/धूप में व्यायाम न करें। धूप में खड़े वाहनों में बच्चों एवं पालतू जानवरों को न छोड़ें। अधिक प्रोटीन वाले तथा बासी खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त सूर्य कान्त त्रिपाठी, एसपी देहात अभिजीत कुमार, समस्त एसडीएम, सीएमओ डा. अशोक कटारिया, जिला सूचना अधिकारी सुमित कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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