संतकबीर नगर में ब्रिटिश मौलाना के मदरसे के ढहाने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक 

 संतकबीर नगर। संतकबीरनगर में ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा का अवैध मदरसा अब ढहाया नहीं जाएगा। डीएम आलोक कुमार ने बताया, हाईकोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण का काम अगले आदेशों तक रोक दिया गया है। आगे हाईकोर्ट के आदेश पर विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।मदरसा प्रबंध कमेटी ने कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। प्रशासन ने बुलडोजर, पोकलेन मशीनें हटा ली हैं।

 बतादें  बीते दो दिनों में प्रशासन ने मदरसे को लगभग ढहा दिया है। रविवार को 13 घंटे तक कार्रवाई चली थी। चारदीवारी और 10 से अधिक पिलर तोड़े गए थे। पीछे का करीब 15 फीट हिस्सा और कमरों की आगे-पीछे की दीवारें ढहा दी गई थीं।

प्रशासन ने सोमवार सुबह 10 बजे दूसरे दिन की कार्रवाई शुरू की। आगे के हिस्से को तोड़ने के लिए 2 पोकलेन मशीनें और 5 बुलडोजर लगाए गए, लेकिन थोड़ी देर बाद एक पोकलेन मशीन में खराबी आ गई। इसके बाद करीब एक घंटे तक कार्रवाई चली, लेकिन मदरसे के पिलर नहीं टूट पाए। फिर प्रशासन ने बुलडोजर और पोकलेन मशीनों को रोक दिया था।मौके पर 30 महिला पुलिसकर्मियों समेत करीब 100 पुलिसवाले तैनात थे। PAC की दो कंपनियां भी लगाई गई थीं।

प्रशासन के मुताबिक, शमसुल ने 8 साल पहले सरकारी जमीन पर 640 वर्गमीटर (करीब 7 हजार वर्गफीट) में तीन मंजिला मदरसे का निर्माण कराया था। इसमें कुल 25 कमरे हैं। इसको बनाने में 5 करोड़ रुपए की लागत आई थी। आरोप है कि इसका निर्माण विदेशी फंडिंग के जरिए किया गया था। मदरसा साल-2024 से बंद है। उस समय मदरसे में करीब 400 बच्चे पढ़ते थे।

प्रशासन के मुताबिक, मदरसा खलीलाबाद तहसील के खलीलाबाद गांव में स्थित है। 2024 में गांव निवासी अब्दुल हकीम ने मदरसे के अवैध निर्माण की शिकायत एसडीएम कोर्ट में की थी। नवंबर 2025 में एसडीएम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया था।

मदरसा प्रबंधन ने डीएम के पास याचिका दाखिल की, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला कमिश्नर के पास पहुंचा। 25 अप्रैल को बस्ती मंडल के कमिश्नर ने याचिका खारिज करते हुए एसडीएम कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने मदरसा कमेटी को ध्वस्तीकरण का रिमाइंडर नोटिस जारी किया था।

शमसुल हुदा खान फिलहाल ब्रिटेन में, वहां की नागरिकता ले रखी

शमसुल हुदा खान फिलहाल ब्रिटेन में रह रहा है। उसने ब्रिटिश नागरिकता ले रखी है। हालांकि, उसकी पत्नी सकलैन खातून, बेटा तौसीफ रजा, बहू नसरीन खलीलाबाद में रहते हैं।

मौलाना 2017 में देश छोड़कर गया था। इसके बावजूद वह 10 साल तक आजमगढ़ के एक मदरसे से वेतन लेता रहा। बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से उसने वीआरएस ले लिया।

करीब पांच महीने पहले मामला सामने आने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था।

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