Friday, 10 April 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य ने बजाया डमरू






 होर्मुज जलडमरूमध्य ने बजाया डमरू  

- ललिता जोशी
आजकल हमारे शांतिप्रिय विश्व के शांति प्रिय देशों की आपसी लड़ाई चर्चा का विषय बना हुआ है । इस युद्ध के मुख्य रूप से तीन प्रतिभागी हैं । दो एक तरफ और एक तरफ । युद्ध चला 35 दिन से भी ज्यादा । रोज नए बयान और नई धमकियाँ । वैसे अब तो सभी देशों को मालूम हो ही गया कि ये धमकियाँ नहीं गीदड़ भभकियाँ थी । दिन में धमकी कि आज की रात बहुत भारी पड़ने वाली क्योंकि हम एक सभ्यता को नष्ट कर देंगे । वो सभ्यता तो नष्ट नहीं हुई मगर एक सभ्यता तो खत्म हुई ।

दादागिरी की सभ्यता को घुटने टेकने पड़े । अब ईरान के होरमुज जलडमरू मध्य ने ऐसा डमरू बजाया कि विश्व के सभी देश उसकी धुन पर नाचे क्योंकि कुछ ने तेल के प्रयोग पर एक लिमिट लगा दी । कहीं पर गैस के सिलेंडरों के लिए लंबी लाइनें ऐसे लगी मानो त्योहारों पर जैसे मंदिरों के बाहर लाइनें लगी हों । मानों जैसे लोग अपने आराध्य के दर्शन के लिए उमड़ पड़े हों । वैसे युद्ध के इस काल में सिलेंडर आराध्य से कम नहीं है । सभी मजहब के लोग इस सिलेंडर के लिए लाइनों में लग कर बेसब्री से उसे पाने का इंतज़ार कर रहे हैं ।

अब तो लग रहा है सिलेंडर नहीं सिखाता आपस में बैर करना । त्तेरा सिलेंडर मेरा सिलेंडर हम सबका प्रिय सिलेंडर ।  ये सिलेंडर किसी भी कद और काठी का हो सकता है । इसका लाल रंग देखकर गाना याद आ रहा है ये लाल रंग मुझे अब कभी ना छोड़े । सिलेंडर लाल हरे शरीर के रक्त का रंग लाल । रक्त जीवनदायी और सिलेंडर भी जीवनदायी । शरीर के लिए भोजन आवश्यक है इसके लिए ईंधन देने वाला है सिलेंडर । वैसे ईंधन के और भी स्रोत हैं मगर सिलेनदेफर का अलग ही स्थान है । इसीलिए सिलेंडर जी तो अब सबके दिल की धड़कन और आँख का तारा बने  हुये  है । इसकी घुसपैठ घर से लेकर होटलों और औद्योगिक इकाइयों में है । ये सभी का पेट भरने का काम करता है ।

इस सिलेंडर को हीरो बनाया होरमुज़ जलडमरू मध्य ने। अमरीका ने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि जिस तेल के लिए ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर उसे काबू कर लेगा । उसी तेल के लिए जहाज जिस जलडमरू मध्य से निकलते थे । अब उस से जहाजों आवाजाही तकरीबन न के बराबर ही थी । विश्व की तेल सप्लाई तो रुक ही गई थी । सभी देशों में तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है । ईरान पर इतने हमले हुए लेकिन वो  भी टक्कर लेता रहा । ईरान के शासकों को एक ही झटके में मार डाला ।अपने शासकों की मृत्यु ने ईरान के सभी नागरिकों को एक जुट कर दिया । ट्रम्प ने बम बजाए और न जाने कितनी मासूम बच्चियाँ इन बमों की भेंट चढ़ गईं और अपने पीछे रोते बिलखते परिजन और अपने अधूरे सतरंगी सपने छोड़ गईं ।

सभी न्यूज़ चेनलों ने ट्रम्प के एक सभ्यता के अंत कर देने वाले बयान को प्रमुखता के साथ दिखाया । इसे दिखाना भी बनता था क्योंकि वोएक शक्तिशाली राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष जो ठहरे । इस देश की नीति है किसी न देश पर अपनी सेनाओं को घुसा दें और फिर कुछ सालों बाद अपना सा मुंह लेकर वहाँ से अपना झूठा विजयनाद करते हुए निकल लो । इनका यही हाल ईरान में हो रहा है । ईरान को मालूम ही था की उसके पास तुरुप का पत्ता होमरूज़जलडमरू है ।  सभ्यता का अंत करने वाले तथाकथित अतिमहानायक को अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण सीजफायर करना पड़ा और वो भी ईरान के शर्तों को मानने के साथ । अभी तो महाशय तेल यानि ट्रम्प जी की दादागिरी और कब्जे वाली प्रवृति और नीति लड़खड़ा गई और अपनी धूलधूसरित होती छवि को बचाने के लिए निरंतर धमकियों की आड़ में वार्ताओं का दौर भी चला मध्यस्थों के माध्यम से।नतीजा अब विश्व के समक्ष है । 
अमरीका के लिए तो वही बात हुई कि नौ दिन चले अढ़ाई कोस । अजी अगर यही करना था आपको तो इतने दिन युद्ध किया ही क्यों ? एक सप्ताह के बाद ये सब मान लेते तो जग हँसाई और रुसवाई नहीं होती । अमेरिका भी अमेरिका है वो  तो इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहा है । ये तो वही बात हुई कि चित भी मेरी पट भी मेरी । इस सब के बीच इज़राइल टस से मस होने को राजी नहीं है । देखते हैं होरमुज जलडमरू मध्य का डमरू  इसजराइल को प्रभावित कर पाता है की नहीं ।  


इसके विपरीत ईरान ने अकेले ही (चने ) भाड़ (पश्चिमी देशों)को फोड़ डाला। इतना ही नहीं ईरान के होरमुज जलडमरू मध्य ने सभी का डमरू बजा दिया और सबका करा दिया  ता ता थईया। ईरान को  इस युद्ध के कारण जो नुकसान हुआ है वो उसकी भरपाई भी अपनी शर्तों पर करेगा । अमेरिका के लिए ये वही बात हुई मियां जी की जूती मियां जी का सिर ।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)

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