ड्रिंक टेक्नोलॉजी दिल्ली और आईफैट दिल्ली 2026 का शुभारंभ, पानी और सस्टेनेबिलिटी पर खास फोकस

मेरठ : ड्रिंक टेक्नोलॉजी दिल्ली (ड्रिंकटेक इंडिया द्वारा संचालित) के साथ आईफैट दिल्ली के पहले संस्करण की शुरुआत यह दिखाती है कि उद्योगों में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। अब सस्टेनेबिलिटी (पर्यावरणीय संतुलन) कोई अलग विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह बिज़नेस के मुख्य फैसलों का हिस्सा बनता जा रहा है।

भारत मंडपम में आयोजित इन दोनों कार्यक्रमों में पेय पदार्थ निर्माण और पर्यावरण तकनीकों को एक साथ एक मंच पर लाया गया है। यह एक साथ आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोल्ड ड्रिंक, बोतलबंद पानी, जूस, डेयरी और अल्कोहल जैसे क्षेत्रों की कंपनियों पर अब संसाधनों के बेहतर उपयोग, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और बदलते नियमों के अनुसार काम करने का दबाव बढ़ रहा है।

मंगलवार को “आवर पावर, आवर प्लैनेट” थीम के तहत उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सरकार, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कई प्रतिनिधि शामिल हुए।

मुख्य सरकारी और संस्थागत प्रतिनिधियों में राजीव रंजन मिश्रा (पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन), डॉ. सबिता माधवी सिंह (जल शक्ति मंत्रालय) और वी. के. चौरसिया (आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय) शामिल रहे। अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से क्रिश्चियन कापफेनस्टाइनर (GIZ) और सुश्री डिकहॉफ (जलवायु एवं पर्यावरण विभाग) उपस्थित रहीं। शोध और संस्थागत क्षेत्र से डॉ. अजीत सालवी, डॉ. सतबीर सिंह कादियान और नितिन बासी ने भाग लिया। उद्योग और आयोजकों की ओर से सी. के. जयपुरिया, डॉ. गुनवीना चड्ढा, हरंजन सिंह, आशीष जैन, रॉबिन फर्नांडीस और रूबी माखिजा मौजूद रहे।इन सभी की मौजूदगी यह दिखाती है कि अब नीति, बुनियादी ढांचे और उद्योग के बीच सस्टेनेबिलिटी और संसाधन प्रबंधन को लेकर बेहतर तालमेल बन रहा है।

दोनों मंच मिलकर कंपनियों को यह समझने का अवसर दे रहे हैं कि वे अपने उत्पादन, पर्यावरण तकनीकों और पैकेजिंग को कैसे बेहतर बनाकर प्रभाव को कम कर सकती हैं और दक्षता बढ़ा सकती हैं।

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