मेरठ के सिद्धार्थ तोमर ने चंडीगढ़ में गाड़ा जीत का झंडा, जीते तीन गोल्ड मेडल

मेरठ। खेल जगत में मेरठ के होनहारों का दबदबा बरकरार है। हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल बैडमिंटन प्रतियोगिता में मेरठ के उभरते सितारे सिद्धार्थ तोमर ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 'गोल्डन हैट्रिक' पूरी की है। सिद्धार्थ ने प्रतियोगिता के तीन अलग-अलग वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल मेरठ, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।

मैदान पर सिद्धार्थ का एकतरफा दबदबा

20 से 23 मार्च 2026 तक चंडीगढ़ में चली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिद्धार्थ ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। आगरा स्टेट चैंपियनशिप में अपनी धाक जमाने के बाद, उनके विजय रथ को नेशनल में भी कोई रोक नहीं पाया।

सिद्धार्थ ने अंडर-16 बॉयज सिंगल्स के फाइनल मुकाबले में प्रतिद्वंद्वी को 21-9, 21-11 के भारी अंतर से शिकस्त दी। इसके बाद बॉयज डबल्स के फाइनल में उन्होंने 21-7, 21-14 से एकतरफा जीत दर्ज की। सिद्धार्थ की स्वर्णिम सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका; मिक्सड डबल्स के फाइनल में भी उन्होंने 21-10, 21-11 के स्कोर के साथ तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

कोचों का मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत

सिद्धार्थ की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और प्रशिक्षकों का सटीक मार्गदर्शन है। वह श्री चैतन्य (Shri Chaitanya) स्थित 'विशेष बैडमिंटन एकेडमी' में अभ्यास करते हैं। उन्हें कोच विशेष काकरान, यश खतियान और आयुषी चौहान द्वारा बारीकियां सिखाई जा रही हैं। सिद्धार्थ ने अपनी इस जीत का मुख्य श्रेय अपने दादा ओमवीर तोमर को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका उत्साहवर्धन किया।

 "सिद्धार्थ की यह जीत उसकी एकाग्रता और अनुशासन का परिणाम है। हमें विश्वास है कि वह भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम चमकाएगा।" — कोच विशेष काकरान

ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत

राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्वर्ण पदक जीतने के बाद मेरठ लौटने पर सिद्धार्थ का जोरदार स्वागत किया गया। खेल प्रेमियों और परिजनों ने उन्हें फूलों की मालाओं से लाद दिया और ढोल-नगाड़ों की थाप पर विजय जुलूस निकाला। उनकी इस उपलब्धि पर डेफ एसोसिएशन के सचिव अनिल कपूर और मेरठ एसोसिएशन के सचिव राजीव चौधरी ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

सिद्धार्थ की यह उपलब्धि मेरठ के अन्य उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। उनकी जीत यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो सफलता निश्चित है।

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