ध्वस्तीकरण से पहले आवास विकास ने दी शास्त्री नगर के सैंट्रल मार्केट के दुकानदारों को राहत की उम्मीद
80 भूखंड स्वामियों को मिले नियमितिकरण के नोटिस, व्यापारियों में छाई खुशी की लहर
मेरठ। सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से दो दिन पहले व्यापारियों को आवास विकास की ओर से एक राहत भरा नोटिस मिला है। नोटिस में 80 भूखंड स्वामियों जिनको आवासीय प्लॉट में कॉर्मशियल गतिविधियां चलाने के चलते घ्वस्तीकरण का नोटिस माननीय सुप्रीम कोर्ट की और से मिला था उनको अपने आवासीय प्लॉट को कमर्शियल में बदलने का नोटिस आवास विकास के कार्यालय वास्तुविद नियोजक ईकाई द्वितीय की मिला है। जिसमें नियमितीकरण तय की गयी धनराशि को एक माह में आवास के खाते में जमा कराना होगा। नोटिस के मिलने से व्यापारियों में एक राहत की उम्मीद जगी है और उनका मानना है कि अब ध्वस्तीकरण नहीं होगा ।इसको लेकर व्यापारी काफी खुश है उनका कहना है कि उनके संघर्ष का परिणाम उन्हें आवास विकास ने दिया है
36000 प्रति मीटर की दर से देना होगा शुल्क
आवास विकास की ओर से व्यापारियों को जो नोटिस मिला है उसके तहत 36000 रूपये प्रति मीटर की दर से शुल्क जमा कराकर व्यापारी अपने आवासीय प्लॉट को कमर्शियल में बदल सकते हैं। जिसके लिए उनको एक महीने का समय मिला है और सेटबैक वह पार्किंग के मानचित्र के अनुसार अपने प्रतिष्ठान चला सकते हैं। बैंक में जमा करने वाले जमीन के आधार पर रखी गयी है। जिसमे कम से कम 21 से अधिक से शुरू होकर एक करोड़ से अधिक रखी गयी है।
बड़े जमा करा देंगे शुल्क छोटे दुकानदार कैसे चुकता करेंगे शुल्क राशि
आवास विकास के वास्तु नियोजक द्वारा जिन अस्सी भूंखड़ स्वामियों को नियमितिकरण करने के लिए राशि रखी गयी है। वह शुरूआत ही लाखो से हो रही है। सवाल उठता है। जिन दुकानदारों की दुकाने छोटी है। उन्होंने तो शटर हटा कर दीवार लगा दी है। जब उनका व्यापार ही नहीं चलेगा तो वह शुल्क कहा से देंगे। यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
बैंक जारी करेंगे लोन ?
शास्त्री नगर के सैक्ट्रर दो में जिन 860 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण के आदेश जनवरी माह में दिए थे। उसमें कई बैंक भी आ रहे है। कोर्ट ने अपने पहले आदेश को बरकरार रखते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश तीन में करने के दिए थे। अब सवाल उठता है। आवास विकास ने अवैध निर्माण को नियमितिकरण करने के लिए शुल्क जमा कराने के लिए कहा है। क्या सुप्रीम कोर्ट आवास के नये आदेश को मानेगा । ऑर हाॅ जब सैट्रंल मार्केट के ध्वस्तीकरण का मामला कोर्ट में चल रहा था तो ऐसे में बैंक भी दुकानदारों को लोन देने से कतरा सकते है।
आवास की झौली में आएगा करोड़ों रूपया
आवास विकास के वास्तु नियोजक विभाग की ओर से नियमितिकरण के करने के लिए जिन अस्सी भूंखडों को नोटिस जारी किए गये है। अगर दुकानदार एक माह के अंदर खाते में पैसा जमा करा देते है तो विभाग के खाते में करोडों रूपये आने के संभावना व्यक्त की जा रही है। लिस्ट में जमा करने वाली राशि सौ करोड़ से अधिक बैठ रही है।
क्या बोले व्यापारी
सेंट्रल मार्केट के अध्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल उर्फ अट्टू का कहना है केि शमन के नोटिस हमें मिले हैं और शासन की इस कार्रवाई से हम संतुष्ट हैं ।यह नोटिस राहत भरा है ।अगर इस नोटिस के अनुसार अपने प्रतिष्ठान बनाकर चलाने से हमें नहीं रोका जाता है तो हमारा व्यापार और भी अधिक सुंदर और अच्छे तरीके से चलेगा। क्योंकि सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ संघर्ष कर रहे थे ।
किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव ने बताया कि आज जो शमन का नोटिस मिला है उससे व्यापारियों को एक राहत की उम्मीद मिली है। इस नोटिस के लिए हम अपने तमाम जनप्रतिनिधियों और आवास विकास का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने व्यापारियों की परेशानी समझते हुए मध्यस्थता कर एक बीच का रास्ता निकाला है। इस आदेश से अब जो दुकान व्यापारियों ने अपने पूरे जीवन की कमाई कर बनाई थी उनको बचाने की एक उम्मीद जगी है।
सेंट्रल मार्केट के महामंत्री निमित जैन ने कहा कि अगर इस नोटिस के अनुसार हमारा जो भूखंड है उसके इस्तेमाल ही बदल जाएंगे। आवासीय की जगह जब कमर्शियल में हमारे प्रतिष्ठान होंगे तो किसी प्रकार की कोई समस्या ही नहीं होगी। हम आवास विकास का इस कार्रवाई के लिए धन्यवाद करते हैं और अब हम सेटबैक का पालन करते हुए अपने प्रतिष्ठानों को रखेंगे।
बोले अधिकारी
अभिषक राज निर्माण खंड एक ने बताया कि परिषद द्वारा जो भी कार्रवाई की जा रही है। वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के तहत की जा रही है। रही बात सेट बेक छोड़ने की रिहायशी व कामर्शियल को दोनेा की सेट बैक छोड़ना होगा। जितना भी अवैध निर्माण है उसे हटाना ही होगा। इसके बाद ही नियमितिकरण की कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम सिटी सैंट्रल मार्केट पहुंचे जरूर लेकिन मीडिया से वह बचते नजर आए । मीडिया ने जब उनसे बात करने का प्रयास किया ताे उन्होनें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
अरविद देव आर्य वास्तुविद नियोजक का कहना है कि परिषद के द्वारा कुछ आवेदन स्वीकार किए गये है। जिन्हेंं नियमों के तहत शुल्क का निर्धारण किया गया है। जो भी कार्य विभाग की तरफ से होगा वो नियमों के अनुरूप स्वीकार किया जाएगा।




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