हर एक कदम उजाले की ओर” वॉकाथॉन का आयोजन
बच्चों से लेकर बुजुर्गो ने वॉकाथॉन में लिया हिस्सा
वॉकाथॉन का उददेश्य नवजात शिशुओं में होने वाली गंभीर आँखों की बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी के प्रति जागरूकता फैलाना रहा
मेरठ। रविवार को चौ. चरण सिंह विवि में आरोण्या फाउडेंशन के तत्वावधान में नवजात शिशुओं में होने वाली गंभीर आँखों की बीमारी रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर एक कदम उजाले की ओर” वॉकाथॉन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन सुबह सात बजे सुभाष चन्द्र प्रेक्षागृह के परिसर के अंदर किया गया। दिल्ली से आयी प्रज्ञा महाजन व प्राची महाजन ने वॉकाथा़ॅन को झंडी दिखाकर रवाना किया । वॉकाथॉन में महिलांए ,बच्चों व बुजुर्गो ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। वॉकाथॉन सुभाष चन्द्र प्रेक्षागृह के बाहर समाप्त हुई।
वॉकथान का उददेश्य ‘नन्ही आँखें’* परियोजना का हिस्सा है, जो नवजात शिशुओं की आँखों की रोशनी बचाने के लिए समर्पित है। यह परियोजना “Mission Zero Blindness, Healthy Nation” के अंतर्गत संचालित की जा रही है। उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि समय से पहले जन्मे बच्चों में होने वाली इस बीमारी की समय पर पहचान और जांच के माध्यम से उनकी आँखों की रोशनी बचाई जा सकती है।वाॅकाथॉन में बडी संख्या में शहर की महिलाओ, बच्चों व बुजुर्गो ने शिरकत की। आयोजन की खास बात यह है कि इसमें सामान्य नागरिकों के साथ-साथ दृष्टिबाधित भी प्रतिभागी रहे, ताकि इस संदेश को और अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, हर साल हजारों बच्चे केवल जागरूकता और समय पर जांच के अभाव में अपनी दृष्टि खो देते हैं, जबकि सही समय पर स्क्रीनिंग और उपचार से इसे रोका जा सकता है।वॉकाथॉन के दौरान प्रतिभागियों ने ज़ुम्बा किया , संगीत और विभिन्न इंटरैक्टिव गतिविधियाँ में प्रतिभागी बने, जिससे यह अनुभव और अधिक प्रेरणादायक और सहभागिता से भरपूर रहा। तकरीबन 300 नागरिकों से इस पहल में भाग लिया और जागरूकता फैलाने की शपथ ली।
संस्था की अध्यक्ष डा कीर्ति जैन ने बताया कि “यह पहल सिर्फ एक वॉक नहीं है, बल्कि एक संकल्प है — हर नन्ही आँख की रोशनी बचाने का। हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग इसमें जुड़ें और इस महत्वपूर्ण विषय के प्रति जागरूक हों।”
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