एआई आधारित स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक बनी नेत्रहीनों के लिए सहारा

मेरठ। नई दिल्ली में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाली इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एमआईईटी के छात्र साहिल गुलाटी भी प्रतिभाग कर रहे हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग अब केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि समाज की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी नवाचार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बी.टेक तृतीय वर्ष (सीएसई–एआई ब्रांच) के छात्र साहिल गुलाटी ने नेत्रहीन व्यक्तियों की सुरक्षा और स्वतंत्र आवागमन को आसान बनाने के लिए एआई आधारित स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक विकसित की है।

साहिल द्वारा तैयार की गई यह एआई ब्लाइंड स्टिक उन्नत सेंसरों और एआई तकनीक से लैस है, जो सामने आने वाली वस्तुओं और बाधाओं को तुरंत पहचान लेती है। जैसे ही रास्ते में कोई अवरोध आता है, यह डिवाइस वास्तविक समय में ऑडियो अलर्ट के माध्यम से उपयोगकर्ता को सतर्क कर देती है, जिससे दुर्घटना की आशंका काफी कम हो जाती है।

इतना ही नहीं, आपात स्थिति में यह स्मार्ट स्टिक एसओएस कॉल भी ट्रिगर कर सकती है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सके। इस तकनीक के माध्यम से नेत्रहीन व्यक्तियों को न केवल सुरक्षित चलने में मदद मिलती है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

साहिल गुलाटी का यह नवाचार इस बात का उदाहरण है कि किस तरह उभरती हुई तकनीकें समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी और समावेशी समाधान प्रदान कर सकती हैं। युवा नवोन्मेषक एआई और मशीन लर्निंग का मानव-केंद्रित उपयोग कर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं, जो भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक संकेत है।

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