ऑर्थोपेडिक सेल के सर्जरी-रहित उपचार ने नोएडा की महिला को घुटने के दर्द से छुटकारा पाने और दुनिया के बड़े काम करने के लिए शक्ति प्रदान
मेरठ : नोएडा की 67 वर्षीय मीनाक्षी सहगल ने अपने घुटनों के गंभीर दर्द को सफ़लतापूर्वक हराकर और रोमांचक कार्यों के प्रति अपने जुनून को वापस पाकर बाधाओं को दूर किया है। छह महीने तक घुटने के गठिया रोग से पीड़ित रहने के बाद, दुनिया की सैर करने के मीनाक्षी के सपने तब तक असंभव लग रहे थे जब तक कि उन्हें हैदराबाद में रेजेनऑर्थोस्पोर्ट में एक अभूतपूर्व समाधान नहीं मिला।
पुनर्योजी चिकित्सा के विशेषज्ञ डॉ. वेंकटेश मोव्वा की विशेष देख-रेख में, मीनाक्षी ने ट्रांसफॉर्मेटिव बोन मैरो स्टेम सेल थेरेपी करवाई, जो कि घुटनों के रिप्लेसमेंट की पारंपरिक सर्जरी का एक परिवर्तनकारी विकल्प है। इस अभिनवकारी इलाज से न केवल उनको घुटने के असहनीय दर्द से राहत मिली, बल्कि उन्हें समुद्र तल से 14,000 फीट की ऊंचाई तक की रोमांचकारी यात्रायें करने के लिए भी शक्ति प्रदान की।
अपनी इस उल्लेखनीय यात्रा के बारे में बताते हुए, मीनाक्षी ने बताया कि डॉ. मोव्वा के साथ संपर्क करने पर उनका शुरुआती संदेह उम्मीद में बदल गया। उन्होंने बताया कि, "उनकी विशेषज्ञता और दयापूर्ण व्यवहार ने मुझे सर्जरी के बजाय बोन मैरो स्टेम सेल थेरेपी चुनने के लिए तैयार कर लिया।"
तीन दिनों तक चलने वाली प्रक्रिया और फिज़ियोथेरेपी की एक विशेष नियमावली के बाद, मीनाक्षी ने कुछ ही सप्ताहों में बहुत बढ़िया सुधारों का अनुभव किया, जिसके परिणामस्वरूप नॉर्वे और पेरू की मुश्क़िलों भरी तराईयों को आसानी से पार कर जाने की उनकी क़ाबिलियत विकसित हुई।
मीनाक्षी के इस परिवर्तन के पीछे दूरदर्शी डॉ. वेंकटेश मोव्वा ने मैरो सेल थेरेपी की ज़िंदगी बदलने वाली क्षमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "मीनाक्षी की कहानी इस बात का एक उदाहरण है कि कैसे समय पर उपचार शुरू करने और उपचार की अत्याधुनिक चीरफाड़ वाली प्रक्रियाओं का सहारा लिए बिना व्यक्तियों को एक नए जीवन का अवसर प्रदान कर सकते हैं।"
मीनाक्षी की जीत की यह दास्तान जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए एक आशा की किरण लेकर आई है, जो इस बात का संकेत देती है कि उपचार के लिए सही तरीके के साथ-साथ रोमांच और गतिशीलता तक पहुँच प्राप्त की जा सकती है।


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