सुभारती लॉ कॉलिज में बाबा साहेब डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की जन्म जयंती पर विशिष्ट व्याख्यान
मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलिज द्वारा बी.आर.अम्बेडकर शोधपीठ के तत्वाधान में एक विशिष्ट व्याख्यान “सतत विकास लक्ष्य (एस.डी.जी.): डॉ. बी.आर.अम्बेडकर के दृष्टिकोण का चित्रण” विषय पर सुभारती विधि संस्थान के निदेशक राजेश चन्द्रा पूर्व न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशन तथा प्रो. डॉ. वैभव गोयल भारतीय संकायाध्यक्ष सुभारती लॉ कॉलिज के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
राजेश चन्द्रा ने उपस्थित श्रोताओं को बाबा साहेब बी.आर.अम्बेडकर के 132 वे जन्म जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें उनके बताये हुए आदर्शों पर चलना चाहिए साथ ही सुभारती लॉ कॉलिज में बी.आर.अम्बेडकर शोध पीठ कार्यरत है, आपको अम्बेडकर के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहिए और अपने ज्ञान संवर्धन के लिए शोध पीठ में उपलब्ध पाठ्य सामग्री का अध्ययन करना चाहिए।
प्रो. डॉ. वैभव गोयल भारतीय ने बताया कि बी.आर.अंबेडकर ने इतनी असमानताओं का सामना करने के बाद सामाजिक सुधार का मोर्चा उठाया। अंबेडकर जी ने ऑल इंडिया क्लासेज एसोसिएशन का संगठन किया। सामाजिक सुधार को लेकर वह बहुत प्रयत्नशील थे। ब्राह्मणों द्वारा छुआछूत की प्रथा को मानना, मंदिरों में प्रवेश ना करने देना, दलितों से भेदभाव, शिक्षकों द्वारा भेदभाव आदि सामाजिक सुधार करने का प्रयत्न किया। 1920 के दशक में मुंबई में डॉ भीमराव अंबेडकर ने अपने भाषण में यह साफ-साफ कहा था कि “जहां मेरे व्यक्तिगत हित और देश हित में टकराव होगा वहां पर मैं देश के हित को प्राथमिकता दूंगा परंतु जहां दलित जातियों के हित और देश के हित में टकराव होगा वहां मैं दलित जातियों को प्राथमिकता दूंगा।
डॉ. प्रेमचन्द्रा ने बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर की 132 वी जन्म जयंती की शुभकामनाएं श्रोताओं को प्रेषित करते हुए कहा कि आज का दिन “अन्तर्राष्ट्रीय समानता दिवस” के रूप में मनाया जाना भारत द्वारा प्रस्तावित है। उन्होंने अम्बेडकर जी के जीवन वृत्त का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि सन् 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 17 सतत विकास लक्ष्यों को सन 2030 तक प्राप्त करने की सार्वभौमिक उदघोषणा की गई है। सतत विकास की परिभाषा, आवश्यकता वं परिसीमाओं के विषय में बताते हुए डॉ. प्रेमचन्द्रा ने कहा कि सतत विकास का तात्पर्य जनसंख्या खाद्य सुरक्षा, प्रजातियों की हानि और अनुवांशिक संसाधनों, ऊर्जा, नवाचार, उद्योग और मानव बस्तियां सभी आपस में जुडे हुए है और इन्हें एक दूसरे से अलग नही किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी.) सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। नीति विकास कार्यक्रम, कार्यान्वयन और प्रबंधन में क्षमता निर्माण के लिए केन्द्र सरकार, राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकारों के साथ सक्रिय रूप से काम करता है। सतत विकास के आधार स्तंभो में सामाजिक समानता, मानव पूंजी, आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि इन्हें प्राप्त करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र या पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधताओं का संरक्षण, समाज का सतत विकास, मानव संसाधनों का संरक्षण तथा जनसंख्या नियंत्रण व प्रबंधन पर काम करना होगा। सतत विकास के 17 सूत्रीय लक्ष्यों में जीवन की गुणवत्ता, लोगो का जीवन स्तर, गरीबी और भूख को दूर करना, सभी प्रकार के भेद भावो को दूर करना तथा शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना व लैंगिक समानता आदि शामिल हैं। सन 2021 में यू.एन.डी.पी. के अचिम स्टेनर ने अम्बेंडकर के दर्शन “समानता एवं सामाजिक न्याय” का जिक्र करते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र 2030 के विकास एजेंडे की महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट करता है। इसके बाद उन्होंने अम्बेडकर के दर्शन को शिक्षित करो, आंदोलन करो और संगठित रहो जो कि SDG-4 गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा पर, किसी समुदाय की प्रगति महिलाओं द्वारा प्राप्त की गई प्रगति पर आधारित है, पति-पत्नि का रिश्ता सबसे करीबी दोस्तों में से एक SDG-5 लैंगिक समानता पर, धर्म वह है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाए, सामाजिक स्वतंत्रता कानूनी स्वतंत्रता से पहले है, SDG-10 असमानता में कमी पर, जीवन सारवान हो, समाज का सेवक बनिये, मानसिक स्वतन्त्रता, मानव अस्तित्व, सम्मानित जीवन और विचारवान बनिए SDG-15 लाइफ ऑन लैण्ड पर, संवैधानिक स्वतन्त्रता, अधिकारो का प्रयोग सबके लिए न केवल किसी वर्ग विशेष के लिए संवैधानिक नैतिकता, मजबूत लोकतंत्र, समाजवाद और धर्म निरपेक्षता को स्थापित करने वाला संविधान SDG-16 शांति न्याय और मजूबत संस्थाएं पर आधारित तथा घोर गरीबी का 2030 तक उन्मूलन कर गरीब और कमजोर लोगों के लिए आर्थिक संसाधनों, बुनियादी सेवाओं, भूमि और संपति पर स्वामित्व व नियंत्रण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, तकनीकी और वित्तीय सेवाओं को उपयुक्त बनाना होगा। अम्बेडकर का मानना था कि वंचित और आर्थिक रूप से पिछ़डे कर्मचारियों के लिए कोई आयकर नही होना चाहिए, भूमि सुधार सहित सतत राष्ट्रीय विकास की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीति, आर्थिक नीतियाँ, कृषि विकास एवं अर्थव्यवस्था के बीच में संतुलन SDG-1 पर आधारित, वैश्र्विक कृषि बाजारों और उनके डेरीवेटिव में व्यापार प्रतिबंधो और विकृतियों को संबोधित करना SDG-2, फसलों के आत्मनिर्भर उत्पादक, वन-खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना, कृषि भूमि और भूमि जोत का समान वितरण SDG-3, स्वस्थ जीवन तथा 2030 तक वैश्विक मातृमृत्यु दर का अनुपात प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना, 2030 तक परिवार नियोजन, सूचना, शिक्षा, राष्ट्रीय कार्यक्रमो में प्रजनन, स्वास्थय देखभाल सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच, जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन, SDG-3, उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति तथा विकासशील देशों में गुणवत्तापरक शिक्षा हेतु उच्च शिक्षित वर्ग आवश्यक है। अम्बेडकर के अनुसार वंचित वर्गों के लिए आरक्षण, गुणवत्तापरक शिक्षा, वंचित छात्रों को मुफ्त शिक्षा SDG-4, लैंगिक समानता प्राप्ति के लिए महिलाओं को समान अधिकार, संपत्ति का स्वामित्व, सशक्तिकरण, सुरक्षा, मुफ्त कानूनी सहायता, नेतृत्व तथा विशेष संवैधानिक प्रावधान होना चाहिए। हाशिए पर रहने वाले वर्ग विशेष के लिए आरक्षण, अतिरिक्त लाभ, सामाजिक आर्थिक सभी क्षेत्रो में संवैधानिक समावेश प्रदान करना आदि SDG-10 एवं 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद उत्सर्जन तीव्रता को 33 से 35% तक कम करना, गैर जीवाश्म ईधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 40% संचयी विद्युत शक्ति स्थापित करने के लिए हरित जलवायु कोष के लिए कम लागत वाली अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करना आदि के विषय में भी डॉ. प्रेमचन्द्रा के द्वारा उपस्थित श्रोताओं को बताया गया।
एल.एल.एम द्वितीय वर्ष की छात्रा मनीषा ने अपने विचार श्रोताओं के समक्ष रखकर कहा कि बाबा साहेब का मानना था कि यदि महिला शिक्षित होगी तो परिवार शिक्षित होगा एवं उन्नति करेगा। शिक्षित परिवार से समाज उन्नति करेगा, और शिक्षित समाज से राष्ट्र उन्नति करेगा।
कार्यक्रम का संचालन एना सिसौदिया द्वारा किया गया, तथा डॉ. प्रेमचन्द्रा द्वारा उपस्थित श्रोतागण को धन्यवाद दिया गया। कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, डॉ. सारिका त्यागी, आफरीन अल्मास, एना सिसोदिया, अजयराज सिंह, मयंक शर्मा आदि शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा उत्साह पूर्वक प्रतिभागिता की गई।


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