सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले शास्त्रीनगर में चला ‘खुद का बुलडोजर’
44 डी-सील भूखंडों में अवैध निर्माण हटाने की होड़, 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी कार्रवाई की रिपोर्ट
मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज हो गई है। आवास विकास परिषद की ओर से डी-सील किए गए 44 भूखंडों में से कुछ के स्वामियों ने अब अपने प्रतिष्ठानों में किए गए अवैध निर्माण को खुद ही हटाना शुरू कर दिया है। सुनवाई से पहले भूखंडों को निर्धारित मानकों के अनुरूप करने की कोशिश की जा रही है।
दरअसल, दो सितंबर को शास्त्रीनगर क्षेत्र में गठित संघर्ष समिति ने मेरठ बंद का ऐलान किया था। इस दौरान 21 सितंबर तक आवास विकास की ओर से किसी तरह की ध्वस्तीकरण या बुलडोजर कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कही गई थी। इससे पहले ही आवास विकास परिषद ने 44 भूखंडों को कुछ शर्तों के साथ डी-सील कर दिया था।
डी-सीलिंग की शर्तों में खुद अवैध हिस्सा हटाना शामिल
डी-सील किए गए भूखंड स्वामियों के सामने शर्त रखी गई थी कि वे अपने प्रतिष्ठानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप करेंगे और निर्माण में किए गए अवैध हिस्से को खुद हटाएंगे। आवास विकास परिषद को इन भूखंडों पर हुई कार्रवाई और मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान पेश करनी है।
सुनवाई से पहले कई जगह टूटने लगी दुकानें
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई नजदीक आते ही 44 भूखंडों में से कुछ के स्वामियों ने अवैध निर्माण हटाने का काम तेज कर दिया है। कई प्रतिष्ठानों के ऐसे हिस्से खुद तोड़े जा रहे हैं, जिन्हें मानकों के विपरीत माना गया है। भूखंड स्वामियों की कोशिश है कि सुनवाई से पहले उनके प्रतिष्ठानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कर दिया जाए और इसकी स्थिति रिपोर्ट में दर्ज हो सके।
हालांकि, अभी सभी 44 भूखंडों पर ध्वस्तीकरण शुरू नहीं हुआ है। कुछ प्रतिष्ठानों में अवैध निर्माण अब भी जस का तस बना हुआ है। ऐसे में 21 सितंबर की सुनवाई से पहले आवास विकास परिषद की कार्रवाई और उसकी रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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