सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर से बिलखती रहीं महिलाएं

44 सील व्यावसायिक परिसरों में छह पर ध्वस्तीकरण, भारी पुलिस बल के बीच सात घंटे चली कार्रवाई; जनप्रतिनिधि और व्यापारी नेता रहे नदारद

मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में बुधवार को आवास विकास परिषद ने भारी पुलिस बल के साथ शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। 44 सील किए गए व्यावसायिक परिसरों में से छह के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया। सुबह छह बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर करीब एक बजे तक चली। कार्रवाई के दौरान कई महिलाएं अधिकारियों के सामने रोती-बिलखती नजर आईं। मौके पर कोई जनप्रतिनिधि, भाजपा नेता या प्रमुख व्यापारी नेता नहीं पहुंचा।

सुबह से छावनी बना रहा क्षेत्र

व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कार्रवाई की पूर्व सूचना उन्हें नहीं दी गई। उनका कहना था कि सुबह छह बजे से पहले ही भारी पुलिस बल के साथ पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया था। लोगों के मुताबिक, पुलिस ने किसी को बाहर जाने और बाहरी लोगों को अंदर आने की अनुमति नहीं दी। मीडियाकर्मियों को भी मौके तक पहुंचने से रोके जाने को लेकर कई बार पुलिस से झड़प हुई। बाद में एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह, एसपी सिटी विनायक भोसले और आवास विकास परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

छह परिसरों के हिस्से तोड़े

आरटीओ रोड पुलिस चौकी चौराहे से नई सड़क के बीच स्थित कई भूखंडों के अवैध निर्माण कार्रवाई की जद में आए। इनमें 697/2, 492/3, 498/3, 1313/3, 1314/3, 12/2 और 670/6 समेत अन्य निर्माण शामिल बताए गए। परिषद के अनुसार 44 सील परिसरों में से 16 में सेटबैक छोड़ने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 28 में अवैध निर्माण हटाया जाना बाकी था। बुधवार को छह परिसरों के अवैध हिस्सों को जेसीबी से गिराया गया। एक जी प्लस थ्री भवन का हिस्सा मजबूत होने के कारण जेसीबी से नहीं टूट सका, जिसके बाद पोर्कलेन मशीन मंगाकर उसे ध्वस्त किया गया।

2 सितंबर के आश्वासन का हवाला

सेंट्रल मार्केट में कार्रवाई के विरोध में गठित संघर्ष समिति ने पहले मेरठ बंद का आह्वान किया था। गुरुद्वारा रोड पर प्रदर्शन के दौरान लोगों को 21 सितंबर तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ था। इसके बाद कुछ भूखंड स्वामियों ने अपने स्तर से अवैध निर्माण हटाना शुरू कर दिया था। व्यापारियों का आरोप है कि इसके बावजूद बुधवार को कार्रवाई की गई।

अगली सुनवाई 21 सितंबर को

बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को 44 व्यावसायिक परिसरों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के आदेश दिए थे। अब मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होनी है। बुधवार की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों में नाराजगी रही। कार्रवाई के दौरान महिलाएं अधिकारियों और पुलिस के सामने गुहार लगाती रहीं। व्यापारियों का आरोप था कि संकट की इस घड़ी में उनका साथ देने के लिए कोई प्रमुख जनप्रतिनिधि या व्यापारी नेता मौके पर मौजूद नहीं था।

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