मायावती का सरकार पर निशाना, बोलीं- यूपीआई शुल्क से बढ़ेगा आमजन पर बोझ
स्मार्ट स्कूल योजना पर भी उठाए सवाल, कहा- डिजिटल शिक्षा से पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जरूरी
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई यूपीआई शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब शुल्क लगाने की व्यवस्था से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि यूपीआई के जरिए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब शुल्क वसूलने की व्यवस्था जनता के खर्च को प्रभावित करेगी। उन्होंने इसे लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम लोगों में बेचैनी और नाराजगी पैदा होना स्वाभाविक है।
‘जेब आम जनता की ही कटेगी’
मायावती ने कहा कि इस शुल्क को भले ही कर का नाम न दिया जाए, लेकिन 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था का असर अंततः आम जनता की जेब पर पड़ेगा। उन्होंने महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की नीतियां लाभ कमाने की बजाय कल्याणकारी दृष्टिकोण पर अधिक केंद्रित होनी चाहिए।
स्मार्ट स्कूल योजना पर भी सवाल
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 14,500 परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था करने से पहले स्कूलों में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने स्कूलों में छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। मायावती ने यह भी सवाल उठाया कि प्रति विद्यालय करीब दो लाख रुपये की लागत में इन सभी बुनियादी जरूरतों के साथ स्मार्ट स्कूल की व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से हो पाएगी।

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