वाल्मीकि समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की उठी आवाज

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार में रविवार को राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा का सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आयोजक एवं मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संस्थापक भगवत प्रसाद मकवाना रहे, जबकि अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष देवदास चौहान ने की। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री रघुराज सिंह रहे। सम्मेलन में कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम, सांसद अनूप प्रधान तथा पंजाब के पूर्व विधायक अटवाल समेत विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए।

वक्ताओं ने वाल्मीकि समाज के उत्थान के लिए शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने समाज के लोगों से संगठित होकर बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने और उन्हें सरकारी सेवाओं के लिए तैयार करने का आह्वान किया। साथ ही राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने पर चिंता जताते हुए संख्या के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी और टिकट दिए जाने की मांग उठाई। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज के लिए कई योजनाएं संचालित की गई हैं, लेकिन अधिकारियों के स्तर पर अपेक्षित क्रियान्वयन नहीं हो पाता। उन्होंने सफाई कार्य में आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल तथा दुर्घटना की स्थिति में सहायता राशि दिए जाने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया।

सम्मेलन में वाल्मीकि समाज के लिए एक प्रमुख मांग निगमों और अन्य संस्थाओं में ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सीधी विभागीय भर्ती किए जाने की रखी गई। मुख्य अतिथि रघुराज सिंह ने वाल्मीकि समाज को मजबूत, ईमानदार और व्यवहारिक समाज बताते हुए कहा कि समाज के प्रतिनिधियों की मांगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखने के लिए वह सहयोग करेंगे। सम्मेलन में उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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