कक्षा 6 के छात्रों को तीसरी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट की राहत

CBSE को कक्षा 7 के छात्रों के समान छूट देने का निर्देश; तीसरी भाषा के आधार पर न पास-फेल होंगे, न बोर्ड परीक्षा का दबाव

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने CBSE को निर्देश दिया कि वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों को कक्षा 7 के छात्रों को मिली छूट के समान सुविधा दी जाए।

तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं

अदालत के निर्देश के मुताबिक मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को तीसरी भाषा की पढ़ाई से जुड़े मूल्यांकन में राहत मिलेगी। जब ये छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे तो तीसरी भाषा की CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा और इसके आधार पर छात्र को पास या फेल नहीं किया जाएगा।

बीच सत्र में बदलाव पर उठे थे सवाल

CBSE की तीन भाषा व्यवस्था को 2026-27 सत्र से कक्षा 6 में लागू किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि कई छात्रों ने पहले से भाषाओं का चयन कर रखा था और बीच में नई व्यवस्था लागू होने से उन्हें परेशानी हो सकती है। स्कूलों में भाषा विकल्प, शिक्षकों, बुनियादी ढांचे और किताबों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए।

CBSE को अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को उन स्कूलों तक पहुंचने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश भी दिया, जहां तीन भाषा नीति लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। अदालत ने इन स्कूलों की समस्याओं का पता लगाकर उनका समाधान करने को कहा है। CBSE को मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

2027 से व्यवस्था पर आगे बढ़ेगा मामला

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 28,819 CBSE स्कूलों में से करीब 99 प्रतिशत में तीन भाषा नीति के लिए आवश्यक ढांचा उपलब्ध है। हालांकि, अदालत ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के समान राहत देने का निर्देश दिया है। तीन भाषा नीति की व्यापक व्यवस्था को लेकर मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

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