36 घंटे बाद भी क्लोरीन गैस की दहशत, घरों में दुबके लोग
एक से दो किमी तक दिखा असर, पेड़-पौधों के पत्ते झुलसे और तांबे-पीतल के बर्तनों पर पड़े धब्बे; STP से सभी कैप्सूल हटाए
मेरठ। पल्लवपुरम फेस-2 स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में क्लोरीन गैस रिसाव के करीब 36 घंटे बाद भी लोगों की दहशत कम नहीं हुई है। मंगलवार शाम हुए रिसाव का असर STP के आसपास करीब एक से दो किलोमीटर तक दिखाई देने की बात सामने आई है। पेड़-पौधों के पत्ते झुलस गए, जबकि घरों में रखे तांबे और पीतल के बर्तनों पर धब्बे पड़ गए। कुछ लोगों ने कपड़ों का रंग फीका पड़ने की भी शिकायत की।
मंगलवार रात कई परिवार घर छोड़कर रिश्तेदारों और सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। बुधवार शाम तक दोबारा गैस रिसाव की आशंका के चलते लोग घरों से बाहर निकलने से बचते रहे। आम दिनों में चहल-पहल वाले क्षेत्र में सड़कों पर सन्नाटा नजर आया। परिजनों ने बच्चों और युवाओं को भी बाहर जाने से रोक दिया।
हल्का रिसाव फिर महसूस होने पर दौड़ी टीम
बुधवार सुबह लोगों ने दोबारा हल्की गैस की गंध और रिसाव महसूस होने की जानकारी दी। इसके बाद जल निगम और दौराला ऑर्गेनिक की टीम STP पहुंची। जांच के बाद रिसाव वाले कैप्सूल को हटाया गया। प्लांट में रखे अन्य गैस कैप्सूल भी बाहर करा दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक अब कैप्सूल के स्थान पर लिक्विड क्लोरीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है।
70 फीसदी प्रभावित घर लौटे
गैस की चपेट में आने से कई लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और घुटन की शिकायत हुई थी। प्रभावित लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। करीब 70 फीसदी लोगों को उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि करीब आधा दर्जन लोग अभी एहतियातन अस्पताल में भर्ती हैं।
STP के कर्मचारियों के अनुसार करीब एक साल पहले प्लांट में क्लोरीन के तीन कैप्सूल रखे गए थे। एक खत्म होने के बाद दूसरे और फिर तीसरे कैप्सूल का इस्तेमाल किया जाता था। मंगलवार को इन्हीं में से एक कैप्सूल से गैस रिसाव हुआ।
बेटी का ऑक्सीजन स्तर 50 से नीचे पहुंचने का दावा
STP के पास रहने वाले धनंजय सिंह ने बताया कि रिसाव के दौरान वह अपने बेटे के साथ बाहर निकले थे। उनके अनुसार उन्होंने कर्मचारी को पहले ही हल्के रिसाव की जानकारी दी थी, लेकिन स्थिति सामान्य बताई गई। बाद में रिसाव बढ़ने पर उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह (41) और बेटी वैष्णवी सिंह (8) इसकी चपेट में आ गईं। धनंजय के मुताबिक, बेटी का ऑक्सीजन स्तर 50 से नीचे पहुंच गया था। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
लोगों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल रिसाव वाले कैप्सूल को हटाना पर्याप्त नहीं है। STP में क्लोरीन के भंडारण और इस्तेमाल की पूरी व्यवस्था की जांच होनी चाहिए। लोगों ने नियमित निगरानी, आपात स्थिति में तत्काल सूचना और बचाव व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
रिसाव के बाद प्लांट परिसर और आसपास का क्षेत्र सूना पड़ा रहा। कैप्सूल हटाए जाने के बाद स्थिति नियंत्रित करने की कार्रवाई की गई, लेकिन दोबारा गैस फैलने की आशंका से लोगों में अभी भी भय बना हुआ है।

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