पुराने वाहनों की जब्ती के बाद स्क्रैप यार्ड पर उठे सवाल, एक लाख की कार की कीमत लगाई 19 हजार
वाहन मालिकों का आरोप- गाड़ी के शीशे टूटे मिले, अंदर रखा सामान भी गायब; डीएम ने प्रशासनिक अधिकारी से जांच कराने की बात कही
मेरठ। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ आरटीओ की कार्रवाई के बीच स्क्रैप यार्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वाहन मालिकों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान घर, गैराज और सड़क किनारे से उठाए गए वाहनों को स्क्रैप यार्ड भेजने के बाद उनकी कीमत मनमाने तरीके से तय की जा रही है। कुछ वाहन मालिकों ने गाड़ियों के शीशे टूटे मिलने और अंदर रखा सामान गायब होने की शिकायत भी की है।
पल्स जिम संचालक अमित जायसवाल की कार भी हापुड़ रोड स्थित अलीपुर के एबीएच स्क्रैप यार्ड भेजी गई। अमित के मुताबिक, उनकी कार की बाजार कीमत करीब एक लाख रुपये है, लेकिन यार्ड में उसकी कीमत महज 19 हजार रुपये लगाई गई।
यार्ड पहुंची कार का टूटा मिला शीशा
अमित जायसवाल का कहना है कि उनकी कार सड़क से उठाकर स्क्रैप यार्ड पहुंचाई गई थी। जब वह वाहन देखने पहुंचे तो कार का शीशा टूटा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि वाहन के अंदर रखा कीमती सामान और कुछ रुपये भी गायब थे।
अमित ने यार्ड में मौजूद शोएब से इस संबंध में बात की, लेकिन उनके मुताबिक शोएब ने सामान गायब होने की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।
बिना सूचना पजेरो यार्ड भेजने का आरोप
जान मोहम्मद भी अपनी पजेरो के संबंध में स्क्रैप यार्ड पहुंचे। उनका कहना है कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की गाड़ी चला रहे थे और आरटीओ की कार्रवाई के बाद वाहन को बिना सूचना दिए यार्ड भेज दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जब्त किए गए वाहन में कोई कीमती सामान मौजूद हो और यार्ड पहुंचने के बाद वह गायब हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यार्ड में मौजूद शोएब के अनुसार, यार्ड जेदी फॉर्म निवासी जियाउद्दीन के नाम पर दर्ज है।
गैराज संचालक ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
लालकुर्ती के गैराज संचालक जुबेर का कहना है कि कई पुराने वाहन लंबे समय से गैराज के बाहर खड़े रहते हैं और चलने की स्थिति में भी नहीं होते। इसके बावजूद ऐसे वाहनों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्क्रैप कारोबारी पुराने वाहनों के अलग-अलग पार्ट्स निकालकर बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त मुनाफा होता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
डीएम बोले- प्रशासनिक अधिकारी करेंगे जांच
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अधिकारी से जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल वाहन मालिकों की शिकायतों, स्क्रैप यार्ड में वाहनों की कीमत तय करने की प्रक्रिया और वाहनों से सामान गायब होने के आरोपों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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