16 हजार अवैध संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से मेडा में हड़कंप

सचिव से जवाब मांगा तो कोर्ट की टिप्पणी-‘आपकी चुप्पी सब बता रही है’; अगले दिन दफ्तर में खुलीं पुरानी फाइलें, कार्रवाई की बढ़ी चिंता

मेरठ। करीब 16 हजार अवैध निर्माणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) में हलचल तेज हो गई है। सोमवार की सुनवाई के बाद मंगलवार को प्राधिकरण कार्यालय में अवैध निर्माणों से जुड़ी पुरानी पत्रावलियां खंगाली जाती रहीं। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच लंबित मामलों, पूर्व में जारी नोटिस और कार्रवाई की स्थिति को लेकर चर्चाएं होती रहीं।

ऑनलाइन सुनवाई में मेडा सचिव से मांगा जवाब

अवैध निर्माणों से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई के दौरान आवास सचिव पी. गुरु प्रसाद भी जुड़े थे। नेटवर्क संबंधी समस्या के कारण उनके प्रभावी ढंग से जवाब नहीं दे पाने की बात सामने आई। इसके बाद अदालत ने पूछा कि मामले में जवाब देने के लिए और कौन मौजूद है। इसके बाद मेडा सचिव भी ऑनलाइन सुनवाई से जुड़े।

अदालत ने मेडा सचिव से मेरठ में अवैध निर्माणों की स्थिति को लेकर सवाल किए और जवाब मांगा। बताया गया कि सचिव स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर अदालत की ओर से टिप्पणी की गई, “आपकी चुप्पी सब बता रही है।” इसके बाद प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई।

पुरानी फाइलों में तलाशे जा रहे कार्रवाई के रिकॉर्ड

मेडा में मंगलवार को अवैध निर्माणों से संबंधित पुरानी फाइलों की पड़ताल तेज दिखाई दी। बिना मानचित्र निर्माण, स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण और भू-उपयोग के विपरीत गतिविधियों से जुड़े मामलों की पत्रावलियां देखी गईं। पूर्व में जारी नोटिस, सीलिंग और अन्य कार्रवाई की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ऐसे मामलों में अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है, जहां शिकायत या अवैध निर्माण की जानकारी के बावजूद कार्रवाई लंबित रही है।

नेताओं से जुड़े निर्माणों की भी चर्चा

करीब 16 हजार संपत्तियों को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ निर्माणों के राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने की बातें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, संबंधित संपत्तियों और व्यक्तियों के बारे में आधिकारिक पुष्टि के बिना इन दावों पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

आवास विकास परिषद भी सख्त

अवैध निर्माणों पर कार्रवाई में सुस्ती को लेकर आवास विकास परिषद के अधिकारियों पर भी नाराजगी जताई गई। आवास आयुक्त अनिल ढींगरा ने सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक कर अवैध निर्माणों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों में तेजी लाने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों से लंबित प्रकरणों की जानकारी लेते हुए स्पष्ट किया गया कि अवैध निर्माण के मामलों में किसी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए। पहले से जारी नोटिस वाले मामलों में नियमानुसार अगली कार्रवाई करने और नए अवैध निर्माणों पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए।

अब रिकॉर्ड से जमीन तक पहुंचेगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मेडा और आवास विकास परिषद दोनों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। अब पुराने मामलों की पत्रावलियों की समीक्षा के साथ मौके पर निर्माण की वास्तविक स्थिति का सत्यापन और कार्रवाई का रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर बढ़ सकता है।

अदालत की सख्ती के बाद प्राधिकरणों में बढ़ी सक्रियता से अवैध निर्माणों के खिलाफ आने वाले दिनों में प्रवर्तन कार्रवाई तेज होने के संकेत हैं। अब निगाह इस बात पर है कि चिन्हित निर्माणों के मामलों में आगे क्या कार्रवाई होती है और जहां लापरवाही सामने आती है, वहां जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।

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