35 साल से मेरठ में रह रही पाकिस्तानी नागरिक सबा मसूद को हाईकोर्ट से जमानत, फर्जी दस्तावेज मामले में मिली राहत
मेरठ। मेरठ में करीब 35 वर्षों से रह रही पाकिस्तानी नागरिक सबा मसूद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने फर्जी दस्तावेज और वोटर आईडी से जुड़े मामले में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने लंबे समय से भारत में वैध निवास, आपराधिक इतिहास नहीं होने और अभियोजन की ओर से पर्याप्त ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने को जमानत का आधार माना।
सबा मसूद मेरठ के जलीकोठी इलाके में अपने परिवार के साथ रह रही थीं। उन्हें दिल्ली गेट थाना पुलिस ने 16 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ मेरठ की रहने वाली रुखसाना खान की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया ठोस साक्ष्य नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि याची ने भारत में रहने के लिए धोखाधड़ी, जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।
सबा की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शादी से पहले उनकी पहचान शबा हनीफ के नाम से थी। उन्होंने वर्ष 1986 में लाहौर में भारतीय नागरिक फरहत मसूद से निकाह किया था। इसके बाद वह वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट और भारतीय अधिकारियों की ओर से जारी दीर्घकालीन वीजा के आधार पर भारत आई थीं और तभी से यहां रह रही हैं।
अदालत को यह भी बताया गया कि सबा के पास मार्च 2027 तक वैध रेजिडेंशियल परमिट और वर्ष 2037 तक वैध वीजा है। उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए वर्ष 2010 और 2011 में आवेदन भी किया था, जो अभी विचाराधीन बताए गए हैं।
राज्य सरकार ने किया जमानत का विरोध
राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष ने सबा पर वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। वहीं, बचाव पक्ष ने उनके लंबे समय से भारत में रहने और किसी आपराधिक इतिहास का रिकॉर्ड नहीं होने की दलील दी।
कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद जमानत मंजूर कर दी।
शिकायत में क्या लगाए गए थे आरोप?
14 फरवरी को मेरठ के देहली गेट थाने में कोठी अतानस निवासी रुखसाना खान ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जली कोठी की नादिर अली बिल्डिंग निवासी बैंड कारोबारी फरहत मसूद पाकिस्तान के लाहौर गए थे, जहां उन्होंने सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया से निकाह किया।
शिकायत के मुताबिक, करीब एक साल बाद नाजिया अपने पति फरहत मसूद के साथ दीर्घकालीन वीजा पर भारत आईं। दंपती के तीन बच्चे हुए, जिनमें दो बेटों का जन्म भारत में हुआ।
वर्ष 1993 में नाजिया पाकिस्तान गईं, जहां 25 मई 1993 को उनकी बेटी एमन का जन्म हुआ। इसके बाद वह पाकिस्तानी पासपोर्ट पर बेटी एमन को लेकर भारत लौट आईं।
शिकायतकर्ता ने सबा पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रहने और परिवार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने जमानत पर सुनवाई के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को देखते हुए उन्हें राहत दे दी।


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