होर्मुज मामले में अकेला पड़ा अमेरिका
जापान और ऑस्ट्रेलिया का मदद से इनकार
जर्मनी -इटली और स्पेन समेत सात देशों ने युद्धपोत भेजने की ट्रंप की अपील ठुकराई
वाशिंगटन ,एजेंसी।होर्मुज जलडमरूमध्य में गहराते वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक मोर्चे पर अलग -थलग पड़ते नजर आ रहे है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के सात सहयोगी देशों ने होर्मुज में मदद के लिए अपनी नौसेना भेजने की अपील की थी। लेकिन अभी तक एक भी देश मदद के लिए सामने नहीं आए हैं। जबकि अमेरिका के ऊर्जा सचिव ने कहा है कि भारत ने ईरान से बात कर अपने जहाज बचा लिए हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने के आह्वान किया था। लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने या तो सतर्क रुख अपनाया है या सीधे तौर पर इनकार कर दिया है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जो अमेरिका के काफी करीबी सहयोगी हैं उन्होंने भी ट्रंप को झटका देते हुए होर्मुज में अपनी नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है। जबकि भारत ने सीक्रेट कूटनीति का रास्ता अपनाया और ईरान से बात कर होर्मुज से अपने जहाज मंगवाने शुरू कर दिए हैं। होर्मुज संकट ने तेल और गैस की सप्लाई काफी हद तक रोक रखी है और अमेरिका हर हाल में इस रास्ते को खुलवाना चाहता है।
होर्मुज संकट के बाद डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ब्लूमबर्ग के एंकर ने कहा कि 'ट्रंप को उम्मीद है कि दूसरे देश अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने में मदद करेंगे। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक भारत ने ईरान से फोन पर बात की है और अपने दो टैंकरों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित किया है। इस समय अमेरिका और इजरायल अकेले पड़ते दिख रहे हैं'।
होर्मुज संकट पर क्या अकेला पड़े डोनाल्ड ट्रंप?
ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के अनुरोध के बाद भी वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि कर दी है कि वह इस क्षेत्र को नौसैनिक सहायता नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ABC को बताया है कि हालांकि यह जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन कैनबरा को कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है और फिलहाल उसकी वहां सेना तैनात करने की कोई योजना नहीं है।
किंग ने कहा कि 'हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेजेंगे। हम जानते हैं कि यह कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है लेकिन यह ऐसा काम नहीं है जिसके लिए हमसे कहा गया हो या जिसमें हम योगदान दे रहे हों।'
जापान ने भी डोनाल्ड ट्रंप को दिया तगड़ा झटका!
दूसरी तरफ समाचार एजेंसी AFP ने बताया है कि जापान भी डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध को ठुकरा चुका है। जापान का कहना है कि वह समुद्री सुरक्षा अभियानों पर 'विचार नहीं कर रहा है' जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया था। जापानी प्रधानमंत्री के हवाले से AFP ने कहा है कि 'जापान को अभी तक अमेरिका से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेजने का कोई अनुरोध नहीं मिला है इसलिए इस पर जवाब देना मुश्किल है।'
जापानी संसद को संबोधित करते हुए जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि 'टोक्यो ने अभी तक किसी भी सैन्य भागीदारी के लिए सहमति नहीं दी है और वह अभी भी अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है।' रॉयटर्स के मुताबिक ताकाइची ने संसद को बताया है कि 'हमने सुरक्षा जहाज भेजने के बारे में अभी तक कोई भी फैसला नहीं किया है। हम लगातार इस बात की जांच कर रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी दायरे में रहकर क्या किया जा सकता है।'
दक्षिण कोरिया ने कहा- कर रहे विचार विमर्श
ऑस्ट्रेलिया और जापान ने जहां होर्मुज में सेना भेजने से साफ इनकार कर दिया है वहीं दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वो 'विचार-विमर्श' कर रहा है। दक्षिण कोरिया ने अमेरिका से बातचीत करने की भी बात कही है। सियोल स्थित दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि 'कोई भी कदम उठाने से पहले स्थिति की पूरी और सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाएगी।'
इसके अलावा ब्रिटेन ने फिलहाल कूटनीतिक रूख अपना रखा है। डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश प्रधानमंत्री आवास) के मुताबिक प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 'वैश्विक शिपिंग में आने वाली बाधाओं' को कम करने के उद्देश्य से जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के विषय पर ट्रंप के साथ बातचीत की है।
भारत की सीक्रेट कूटनीति का कमाल
इन देशों के उलट भारत ने कूटनीति के रास्ते ईरान से होर्मुज संकट पर लगातार बात की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बात की। दूसरी तरफ भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कम से कम चार बार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बात की है। इस कूटनीति का नतीजा ही है कि ईरान ने दो भारतीय जहाजों को, जिसमें गैस था, उसे होर्मुज से गुजरने की इजाजत दे दी। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वो और भारतीय जहाजों को होर्मुज पार करने की अनुमति दे सकता है।
अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने एनबीसी न्यूज से बात करते हुए कहा है कि 'होर्मुज से पांच टैकर पिछली रात को गुजरे हैं जिनमें LPG था। इनपर कोई फायरिंग नहीं की गई। तो हमें पता है कि होर्मुज से जहाजों का गुजरना संभव है। ईरान ने जहाजों पर हमले नहीं किए हैं शायद उन्होंने भारत के साथ कोई डील कर लिया है।'
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत ने शुरूआती चूक के बाद ईरान के साथ फिर से अपनी डिप्लोमेटिक ताकत का इस्तेमाल किया है। भारत ने ईरान सरकार से लगातार बात की है और उसी का नतीजा है कि ईरान ने भारतीय जहाजों को गुजरने दिया है और आगे भी ऐसा होने की उम्मीद है। जबकि डोनाल्ड ट्रंप बिल्कुल अकेले दिख रहे हैं। अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी उन्हें अकेला छोड़ दिया है।


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