पाकिस्तानी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
पाक महिला को लेकर कोर्ट में बीस मिनट तक चली बहस
मेरठ। मंगलवार को देहली गेट पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गयी पाकिस्तानी महिला सबा फरहत को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। लगभग 20 मिनट चली बहस के बाद दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी महिला की रिमांड रिफ्यूज करने की प्रतिवादी पक्ष की अपील को ख़ारिज करते हुए और 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजनें का फरमान सुना दिया। बुधवार को बेल पर सुनवाई होगी।
कोठी अतानस देहलीगेट निवासी रुकसाना ने पाकिस्तानी महिला सबा फरहत उर्फ नाजी उर्फ नाजिया पर गैरकानूनी तरीके से भारत में रहने का आरोप लगाया था। महिला ने बताया कि नादिर अली बिल्डिंग निवासी फरहत मसूद ने पाकिस्तान जाकर सबा उर्फ नाजी से निकाह किया। 25 मई, 1993 को पाकिस्तान में सबा ने एक बेटी ऐमन फरहत को जन्म दिया। बाद में वह लान्ग टर्म वीजा पर भारत आ गई और अपने पासपोर्ट पर बेटी को भी ले आई।
देहलीगेट थाने में दर्ज की गई एफआईआर
रुखसाना ने शिकायत पत्र में जो आरोप लगाए थे उनमें सबा फरहत पर कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर वोटर आईडी तैयार कराने का भी आरोप लगाया था। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने इसकी जांच कराई। बताया जाता है कि जांच में आरोप सही पाए गए जिसके आधार पर एक मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया। सोमवार को देहलीगेट थाने की पुलिस ने सबा फरहत को गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट में 20 मिनट तक चली बहस
देहलीगेट पुलिस ने मंगलवार को सबा फरहत को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में पेश किया। सबा फरहत के अधिवक्ता वीके शर्मा ने पुलिस की रिमांड का विरोध किया और सबा फरहत पर लगाए आरोपों को निराधार बताया। लगभग 20 मिनट तक वादी और प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच बहस चली जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। लगभग तीन घंटे बाद कोर्ट ने पाकिस्तानी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया।
एडवोकेट राहुल भड़ाना ने बताया कि उनकी तरफ से रिमांड डाली गई थी जिसका प्रतिवादी पक्ष की अधिवक्ता ने अपोज किया था। हमने कोर्ट को बताया कि जितने भी आरोप लगाए गए हैं, सभी की पहले जांच की गई है। किसी को आधार बनाते हुए कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में सबा फरहत को भेज दिया है।
एडवोकेट वीके शर्मा ने बताया कि हमने रिमांड रिफ्यूज के लिए आवेदन किया था, क्योंकि जितने भी चार्ज पुलिस के द्वारा लगाए गए थे, उनमें 7 साल से कम की सजा का प्रावधान है। बस एक आजीवन कारावास है और वह एनसीआर है। बहस सुनने के बाद कोर्ट ने पुलिस रिमांड तो मंजूर नहीं किया लेकिन न्यायिक रिमांड दे दी। अब बुधवार को बेल के लिए आवेदन किया जाएगा।


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