शिक्षा को आंचलिक रूप से समृद्ध करना जरूरीः प्रो.एके त्यागी

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की काशी ने मनाया कर्तव्य बोध पखवारा
वाराणसी।राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की काशी महानगर इकाई एवं जीवनदीप महाविद्यालय बड़ा लालपुर,वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में कर्तव्य बोध पखवारा का आयोजन किया गया। इसके तहत प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षण के क्षेत्र में नव प्रतिमान स्थापित करने वाले सभी संवर्गों के कुल 71 शिक्षकों को युवा शक्ति सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आयोजित शैक्षिक संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर पुष्प अर्पण तथा दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुआ। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि  पद से बोलते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि हमें खुद आत्मनिरीक्षण करना होगा, केवल छात्रों को ही नहीं जिम्मेदार बनाएंगे। कक्षा में नयापन आना चाहिए। प्रो. त्यागी ने कहा कि ज्ञान केवल सूचना मात्र नहीं है। वास्तविक ज्ञान वही है जिससे मानवता की शास्वतता सुनिश्चित हो सके। आज शिक्षा को आंचलिक रूप से समृद्ध करने की आवश्यकता है।
संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दीनानाथ सिंह  ने कहा कि आज की युवा शक्ति को राष्ट्रहित में अपने पुरोधाओं के आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता व गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.आर एस दूबे ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि सनातन धर्म के मूल्यों को आत्मसात करें। संगोष्ठी में विद्या भारती के प्रो०रघुराज सिंह ने विशिष्ट अतिथि के रुप में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज शिक्षा में नवाचार की विशेष जरुरत है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने किया। कार्यक्रम का समापन वन्देमातरम से हुआ। संगोष्ठी का संचालन डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित एवं प्रो. अंजू सिंह ने किया।
संगोष्ठी में प्रो. केके सिंह, चीफ प्रॉक्टर, म. गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी, प्रो. अरविंद मिश्रा, प्रो. बीरेन्द्र कुमार निर्मल, प्रो. नलिनी श्याम कामिल, प्रो. वंदना पांडेय, प्रो. राघवेन्द्र कुमार पांडेय, प्रो० प्रतिभा सिंह, प्रो० संजय चतुर्वेदी, प्रो. ओ पी चौधरी, प्रो.दया शंकर यादव, प्रो. अरुण कुमार राय, डॉ प्रभात सिंह आदि मौजूद रहे। 

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